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ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करेंगे राज्यपाल, अफसर भी करें क्षेत्र का भ्रमण

महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी ली राज्यपाल ने
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ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करेंगे राज्यपाल, अफसर भी करें क्षेत्र का भ्रमण

ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करेंगे राज्यपाल, अफसर भी करें क्षेत्र का भ्रमण

भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि अब ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत पता चलेगी। योजनाओं को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। गुरुवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की गतिविधियों एवं योजनाओं के बारे में जानकारी लेते वक्त उन्होंने अफसरों से यह बात कही। साथ ही अफसरों को निर्देश दिए कि वे भी क्षेत्र का दौरा करें। जिससे योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिलें। उनको लागू करने का प्रभावी तरीका और अधिक बेहतर हो, इसके लिए हम सबको मिल जुलकर प्रयास करना जरुरी है। स्थानीय स्तर पर कार्य के दौरान आने वाली समस्याओं, उनके समाधान के लिए किए गये प्रयासों पर अधिकारियों को कर्मचारियों के साथ जीवंत संवाद रखना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि कुपोषण की समस्या का मूल कारण किशोरी बालिकाओं और गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के प्रति परिवार में होने वाली अनदेखी है। कुपोषण के संबंध में विभिन्न देशों की स्थिति का अध्ययन करने वाले चिकित्सक के साथ चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि गर्भावस्था में ही महिला की स्वास्थ्य जाँच कर रक्त की कमी को दूर कर दिया जाए तो बच्चों में कुपोषण की प्रमुख समस्या एनीमिया को दूर किया जा सकता है। इसी तरह किशोरावस्था में बालिकाओं के स्वास्थ्य की उचित देखभाल भी अनेक जन्म-जात रोगों को दूर कर सकती है। उन्होंने कहा कि बालिकाएँ दो घरों को बनाती है। यह सर्वमान्य तथ्य है। इसलिए बालिका शिक्षा के कार्यों पर विशेष बल दिया जाए। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा की स्थिति की समीक्षा कर ड्राप आऊट और पुन: अध्ययन प्रारम्भ करने के क्रम को ट्रेक किया जाना चाहिए। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास विभागग के प्रमुख सचिव अशोक शाह ने विभाग की गतिविधियों का विवरण दिया। बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा राजभवन एवं महिला बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पात्र व्यक्तियों को ही मिले योजनाओं का लाभ -

राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को मिले। इसके लिए लोगों को जागरूक भी करना जरूरी है। विभाग के अंतिम कड़ी के कार्यकर्ताओं को स्थानीय बोलियों में योजनाओं की मंशा और उनके लाभों के प्रति जागरुक करने के कार्य किए जाने चाहिए। उन्होंने गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों में कालीन बुनकरों के मध्य प्रचलित गीत का उल्लेख करते हुए बताया कि समुदाय की महिला द्वारा गीत की रचना की गई है जो कालीन बुनने की विधि है। बुनकर उसे गाते गाते कालीन बुन लेते है। गीत कहानी का तरीका सूचित, शिक्षित करने प्रभावी तरीका होता है।