
Bhel will build weapons
इस कारण प्रोसेसिंग का काम नहीं हो पाता। मेडिकल जैसी सेेवा में सिलेंडरों की सप्लाई में दिक्कत आती है। पास में ही मीत इंडस्ट्री है जिसमें फ्रेब्रीकेशन का काम होता है। ये नालों में पानी भरने की समस्या से जूझ रहे हैं। ओनर जसबीर सिंह बताते हैं कि बरसात के दिनों में पानी फैक्ट्री में घुस जाता है। इससे काम बंद हो जाता है।
नाले को लेकर पिछले 10 सालों में कुछ नहीं किया गया। इससे अकेली एक नहीं बल्की तीन सेक्टरों की फैक्ट्री प्रभावित रहती हैं। कई फैक्ट्रीयों में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। उनका पानी खाली प्लॉटों में जाता है।
इंडस्टीयल एरिया में छा जाता है अंधेरा...
कहने को इंडस्ट्रीयल एरिया है, लेकिन रात होते ही डी से लेकर कोलुआ गांव जो अयोध्या बायपास तक निकलती है। पर अंधेरा छा जाता है। पूरे क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट नाम के लिए लगीं हैं। आधी से ज्यादा खराब हो गईं हैं।
लाइटों पर बेल चढ़ गई हैं, इससे पता चलता है कि सालों से उनका बल्व नहीं बदला गया। लोहा कारोबारी शाहजी बताते हैं कि लाइटों के कारण बहुत परेशानी होती है। रात होते ही यहां एक्सीडेंट जोन बन जाता है। बड़े वाहनों के आवागमन से लोगों को परेशानी होती है।
शिवम इंटरप्राइजेज के संचालक सुनील दुबे बताते हैं कि सड़कें न बनने से भारी परेशानी होती है। जेके रोड पर पानी निकासी के कोई इंतजाम नहीं हैं। नाली तक न होने से बरसात का पानी सड़कों पर आता है।
सिर्फ कागजों में ही हुआ विकास....
इंडस्ट्रीयल एरिया के विकास को लेकर पिछले दो साल में कमिश्नर कार्यालय में आधा दर्जन बैठकें हुईं, लेकिन विकास नहीं हुआ। अतिक्रमण हटाए तो वो फिर से हो गए। कारोबारियों ने मांग की थी कि इंडस्ट्रीयों के बाहर चाय ठेले हटवाएं।
क्योंकि ट्रक मुड़ नहीं पाते, उनकी पार्र्किंग व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। चौकी के लिए जगह चिन्हित की गई, बनी वो भी नहीं।
200 करोड़ से ज्यादा का टैक्स ...
डस्ट्रीयल एरिया की 1021 इंडस्ट्रीयों से हर साल 200 करोड़ से ज्यादा का टैक्स जाता है, लेकिन सुविधा ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। यहां 30 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है, लेकिन क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट के संसाधन तक नहीं हैं।
इंडस्ट्रीयल एरिया में आधाी सड़के 2015 में बनीं थीं, इसके बाद बनी ही नहीं। सड़कें खराब हैं, तार खंभों पर झूल रहे हैं। ट्रकों के आवागमन से टूट जाते हैं। अतिक्रमण अलग समस्या बनता जा रहा है। कई बार बैठकों में बात हुई, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं आया।
एसके पाली, अध्यक्ष, गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
नाम बड़े और व्यवस्था छोटी...
एक नजर
- 1021 छोटी बड़ी फैक्ट्री
-ए से आई सेक्टर, 750 एकड़ में फैला विशालकाय कारोबारी क्षेत्र
-32 किलोमीटर की सड़कें, 2015 में सिर्फ 16 किलोमीटर तक बनीं
- सुरक्षा के नाम पर चौकी के लिए जमीन का आवंटन
-प्रतिदिन 150 से ज्यादा ट्रकों की आवाजाही
- 30 हजार लोगों को रोजगार मिलता है
Published on:
23 Oct 2018 10:06 am
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