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सोसायटियों की जमीनों के करोड़ों में सौदे, सदस्य और फाउंडर मैंम्बर आज तक हैं परेशान

- टॉप टेन सोसायटियों में शामिल रोहित, गौरव, निजामुद्दीन, शिल्पी, आकांक्षा सहित अन्य में खुर्द बुर्द कर दी जमीनें

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22 Panchayats and 17 private land sand mines runing,22 Panchayats and 17 private land sand mines runing,ग्रामीणों ने 600 बीघा ओरण भूमि में उगाई सेवण घास,,ग्रामीणों ने 600 बीघा ओरण भूमि में उगाई सेवण घास

भोपाल। रोहित गृह निर्माण सोसायटी में घनश्याम राजपूत ने 4.70 लाख कीमत वाले एक हजार स्क्वायर फीट प्लॉट के सौदे 15 लाख में किए। जिनको बेचे उनमें से कइयों को पजेशन भी नहीं दिया। इस समिति में सदस्यों का हक तो मारा गया किसी कमजोर ने सौदा किया तो उसे भी हक नहीं मिला किसी तीसरे को और महंगी दरों पर रजिस्ट्री कराई। इस डीलिंग का रुपया सोसायटी के टीटी नगर स्थित ब्रांच में जमा कर निकाल भी लिया। रोहित गृह निर्माण समिति के 1500 प्लॉटों में से 400 में इसी तरह की हेराफेरी कर करोड़ों रुपया बनाया गया। इसी प्रकार गौरव, निजामुद्दीन, नीलबड़, शिल्पी, अकांक्षा, समन्वय सहित अन्य सोसायटियों में हुआ है। इन मामलों में पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए मुआवजा और प्लॉट दो रास्ते हैं।

रोहित गृह निर्माण सोसायटी के 11 बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में रहे जेके जैन बताते हैं कि रोहित गृह निर्माण सोसायटी को बावडिय़ाकलां और जाटखेड़ी में 103 एकड़ जमीन दी गई थी। 1500 सदस्यों को एक-एक हजार स्क्वायर फीट के प्लॉट 4.70 लाख रुपए की कीमत पर देने थे। 1983 से 2003 तक जब तक समिति का बोर्ड काम करता रहा 1200 सदस्या को प्लॉट मिल गई। समिति का ऑडिट भी हुआ। वर्ष 2006-07 में घनश्याम राजपूत की एंट्री के बाद समिति में फर्जीवाड़े शुरू हो गए। आज 511 सदस्यों की सूची है जिनको प्लॉट नहीं मिले हैं।

राष्ट्रपति तक की शिकायत, 870 लोगों का रुपया डूबा
समन्वय गृह निर्माण सोसायटी में हुए घोटाले के संबंध में पीडि़त और शिकायतकर्ता एसएस मेहता ने राष्ट्रपति तक के यहां शिकायत की। जांच-पर जांच हुई, तत्कालीन कलेक्टर ने मेहता से जुड़े छह प्लॉट की रजिस्ट्री शून्य करने के संबंध में आदेश भी जारी कर दिए। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। मेहता और उनके छह रिश्तेदारों ने 1986 में डेढ़-डेढ़ लाख रुपए जमा कर प्लॉट बुक किए थे। अकेले मेहता ही नहीं इस समिति में 870 पीडि़त हैं। रिकॉर्ड किया जा सकता है जप्त, हाल में कराई रजिस्ट्री

गौरव गृह निर्माण समिति में भी बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े हुए हैं। पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों की कारगुजारी से कई सदस्यों को उनके प्लॉट नहीं मिले। जो प्लॉट नगर निगम में बंधक रखे गए उन्हें चुपके से बंधक मुक्त कर दूसरों के नाम रजिस्ट्री करा दी। 1981 में समिति का गठन किया गया था। उस समय 50 प्लॉट और 44 मैम्बर थे। छह प्लॉट रिजर्व कर लिए थे। 2005 में 2400 वर्ग गज के प्लॉट के दो प्लॉट कर दिए। एक प्लॉट 1312 स्क्वायर फीट के प्लॉट कट गए। इसमें 74 भूखंड बेच दिए गए, 50 पर ड्यूप्लेक्स बनाकर बेचे गए। अब 25 प्लॉट खाली पड़े हैं, 44 मैम्बर बाकी हैं जिन्हें प्लॉट नहीं मिले हैं। हाल की में 16 रजिस्ट्री कराने की जानकारी सामने आई है। इस समिति का रिकॉर्ड जब्त किया जा सकता है।

पीडि़तों को प्लॉट, ड्यूप्लेक्स या मुआवजा मिलेगा
इस संबंध में प्रशासन की तरफ से की जा रही जांच के बाद अगर समिति के पास जमीन मिलती है तो सदस्यों को उनके हिस्से के प्लॉट दिलाए जाएंगे। अगर कहीं कोई विवादित ड्यूप्लेक्स है तो उसके विवाद का हल कर उसे आवंटित किया जाएगा। अगर इन दोनों स्थितियों में पीडि़त को न्याय नहीं मिला तो संबंधित समिति के खाते में जमा रकम से पीडि़त को मुआवजा राशि दिलाई जाएगी। सूची बनाकर दिलाएंगे हक..

सोसायटियों के संबंध में स्पष्ट है कि जांच के बाद पीडि़तों और जिन लोगों को प्लॉट नहीं मिले हैं, उनकी सूची तैयार कराई जाएगी। सोसायटी के पास जमीन है तो जमीन वर्ना समिति के खाते में जमा रकम या जब्त की गई राशि से उन्हें उनका हक दिलाएंगे।
तरुण पिथोड़े, कलेक्टर