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चॉइस फिलिंग प्रक्रिया को अतिथि विद्वानों ने भ्रामक बताते हुए किया विरोध

54 दिनों से शाहजहांनी पार्क में आंदोलन कर रहे अतिथि विद्वान

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भोपाल

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Vikas Verma

Feb 01, 2020

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भोपाल। नियमितीकरण की मांग को लेकर पिछले 54 दिनों से शाहजहांनी पार्क में आंदोलन कर रहे अतिथि विद्वान सरकार से वचनपत्र अनुसार नियमितीकरण किए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकार ने नियमितीकरण तो दूर लगभग 2700 अतिथि विद्वानों को फालेन आउट कर बेरोजगार कर दिया है। अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ. देवराज सिंह ने बताया कि हम उ'च शिक्षा विभाग द्वारा थोपी जा रही भेदभावपूर्ण और भ्रामक चॉइस फिलिंग प्रक्रिया का विरोध करते हैं। यह चॉइस फिलिंग अतिथि विद्वानो के भविष्य का संरक्षण नही बल्कि शेष संभावनाओं को भी पूरी तरह बर्बाद कर देगी।

मोर्चा के संयोजक डॉ. सुरजीत भदौरिया के अनुसार उ'च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी लगातार अतिथि विद्वानों को यह बोलकर गुमराह कर रहे है कि कोई भी अतिथि विद्वान सेवा से बाहर नहीं होगा। 2700 अतिथि विद्वानों के सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। जबकि चॉइस फिलिंग पहले लगभग 1200 पदों और नए शेड्यूल अनुसार अब केवल लगभग 680 पदों पर की जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया पूर्णत: भ्रामक एवं अन्यायपूर्ण है। इस चॉइस फिलिंग प्रक्रिया का हम विरोध करते है।

राज्यपाल से मांगी अंग बेचने की अनुमति

अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता डॉ. मंसूर अली ने बताया कि लगातार अतिथि विद्वानों व उन पर आश्रित पारवारिक सदस्यों की असमय मृत्यु के बाद भी उ'च शिक्षा विभाग की नींद नहीं टूटी। इससे व्यथित अतिथि विद्वानों ने राÓयपाल को पत्र लिखकर अपने अंग तक को बेचने की अनुमति मांगी है। पत्र में अनुरोध किया गया है कि प्रदेश सरकार ने न सिर्फ नौकरी से बाहर कर दिया है बल्कि 8 माह से वेतन रोककर आर्थिक रूप से हमें तोड़ दिया है। अब अपने और परिवार के गुज़ार के लिए हमारे पास अपने अंग बेचने के अलावा कोई रास्ता शेष नही है।