
भोपाल। केन्द्र सरकार की ओर से लाई जा रही नई हज नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल, जयपुर , गुवाहाटी, श्रीनगर, रांची, नागपुर, गया, कालीकट, इंदौर, मैंगलोर, वाराणसी, गोवा यानी 12 शहरों से हज के लिए सीधी फ्लाइट की सुविधा बंद करने की सरकार की मंशा है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि 2018 में हज नई नीति से होगा।
हज कमेटी की सिफारिशों में 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को 4 या इससे अधिक के समूह में बिना मेहरम (अकेले) के हज पर जाने देने की सिफारिश पर विरोध खड़ा हो सकता है। इस्लाम के जानकार इसे शरीया के खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि केन्द्र की 2013-17 की नीति में भी लिखा है कि सऊदी अरब बिना मेहरम के हज पर नहीं जाने देता है।
यह नियम दुनिया भर की महिलाओं पर लागू किया जाता है। इसी तरह 70 साल से अधिक आयु के हज के इच्छुक और लगातार चार बार आवेदन करने वाले लोगों और को अब तक वरीयता मिलती रही है। नई नीति में इसे भी समाप्त किया जा रहा है।
साल 2017 में मध्यप्रदेश:
इस साल हज यात्रा पर गए लोगों की भोपाल वापसी का सिलसिला इस वर्ष 21 सितंबर होकर 27 सितंबर तक चला। वहीं हज पर जाने का सिलसिला 8 अगस्त से शुरू हुआ था। भोपाल वापसी के तहत पहले दिन सऊदी अरब के जद्दा से पहली फ्लाइट यहां राजा भोज एयरपोर्ट पर सुबह 10.40 बजे व दूसरी फ्लाइट शाम 4.40 बजे आनी थीं, जो कई बार लेट भी हुईं।शुरू के 5 दिन रोज दो और आखिरी दो दिनों में एक-एक फ्लाइट आई।
वहीं हज के मुकद्दस सफर के लिए राजधानी भोपाल से फ्लाइट का सिलसिला 8 अगस्त से शुरू हुआ था। जो 13 अगस्त तक रहा। इस दौरान प्रतिदिन दो उड़ाने रही। जिससे यात्रियों को सीधे जद्दा पहुंचाया गया था, इसी प्रकार मदीना से हज यात्रियों की वापसी का सिलसिला 21 सितंबर से शुरू हुआ। जबकि हज के लिए इंदौर से उड़ानों का सिलसिला 14 अगस्त से शुरू हुआ था। इस वर्ष यहां से 19 अगस्त तक उड़ाने रही। वहीं इंदौर के लिए मदीना से हज यात्रियों की वापसी 27 सितम्बर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक रही।
...तो कहां से मिलेगी उड़ान
केन्द्र सरकार ने करीब 12 वर्ष पहले हाजियों की परेशानी के मद्देनजर कई राज्यों में हज के लिए स्थानीय स्तर पर उड़ान शुरू कराई थी। सरकार ऐसे स्थानों की संख्या 21 से घटाकर 9 कर रही है। ये सिफारिशें लागू हुईं तो इन राज्यों के हज यात्रियों को हवाई जहाज पकडऩे के लिए दिल्ली, अहमदाबाद या मुंबई जाना पड़ सकता है। सरकार इन तीन शहरों के अलावा लखनऊ, कोलकता, चेन्नई, हैदराबाद, बंगलुरु और कोच्चि में ही यह सुविधा देना चाहती है।
निजी ट्यूर ऑपरेटरों का कोटा बढ़ेगा
नई नीति के तहत निजी ट्यूर ऑपरेटरों का कोटा 30 फीसदी तय किया जा रहा है। जबकि वर्तमान में यह करीब 26 फीसदी है।
क्या है मेहरम
किसी भी महिला के परिवार का पुरुष सदस्य, जिससे वह महिला निकाह नहीं कर सकती, जिनमें पिता, सगा भाई, पुत्र, पौत्र, नवासे को महिला का मेहरम कहा जाता है। अब तक बेवा, तलाकशुदा या अन्य किसी भी महिला को हज के लिए मेहरम के साथ जाना जरूरी रहा है। किसी भी महिला को बिना मेहरम के हज पर जाने की इजाजत नहीं है।
नई हज नीति के तहत 45 साल से अधिक उम्र की महिला को समूह में जाने की इजाजत दी जा रही है, जो ठीक नहीं है। जयपुर से लाइट नहीं मिली तो प्रदेशभर के हजारों यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा, परेशानी भी होगी। निजी टूर ऑपरेटरों का कोटा बढ़ाना भी गलत है। 70 साल से अधिक वालों का हज के लिए सीधे चयन होना चाहिए। इसके विरोध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और हज कमेटी को ज्ञापन भेजा जाएगा।
- हाजी निजामुद्दीन, जनरल सैकट्री, राजस्थान हज वेलफयेर सोसायटी
Published on:
09 Oct 2017 08:45 am
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