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पंजीकृत किसानों की संख्या हुई आधी, बंद हो सकते हैं कई खरीदी केंद्र

जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने को लेकर किसानों की रुचि कम होती नजर आ रही है। यही कारण है कि गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या इस साल घटकर आधी हो गई है।

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पंजीकृत किसानों की संख्या हुई आधी

Number of registered farmers halved

बैतूल. जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने को लेकर किसानों की रुचि कम होती नजर आ रही है। यही कारण है कि गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या इस साल घटकर आधी हो गई है। इस वजह से दूसरी बार पंजीयन की खरीख बढ़ाकर 10 मार्च करना पड़ा है। इस स्थिति के चलते शासन को खरीदी केंद्रों की संख्या में भी कटौती करना पड़ रही है। वहीं किसानों से कितनी मात्रा में उपज खरीदी जाना है यह प्रति हैक्टेयर उत्पादकता अभी तय नहीं हो सकी है, क्योंकि भूअभिलेख विभाग से क्राप कटिंग के आंकड़ें अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।वर्तमान में क्राप कटिंग का काम खेतों में चल रहा है। इस आधार पर ही खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। वहीं पिछले साल गेहूं खरीदी कम होने पर इस साल केंद्र सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में 110 रुपए की वृद्धि करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2125 रुपए निर्धारित किया है।

घटकर आधी हुई पंजीकृत किसानों की संख्या
जिले में समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए हर साल बड़ी संख्या में किसान पंजीयन कराते हैं, लेकिन इस साल महज 20 हजार 430 किसानों ने ही अपना पंजीयन कराया है। जबकि पिछले साल पंजीकृत किसानों की संख्या 40 हजार 267 हुई थी। इस हिसाब से देखा जाए तो आधे किसानों ने पंजीयन करना तक उचित नहीं समझा है।किसानों के पंजीयन नहीं कराए जाने के पीछे बड़ा कारण खुले बाजार में वर्तमान में गेहूं के दाम 1900 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल पर चल रहे हैं। हालांकि खुले बाजार में अभी गेहूं के दामों में गिरावट आ गई है लेकिन पहले गेहूं के दाम 2800 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे।

खरीदी केंद्रों की संख्या घटाने की तैयारी
समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए अभी तक केंद्रों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। पिछले साल गेहूं खरीदी के लिए कुल 90 केंद्र बनाए गए थे, लेकिन साल पंजीकृत किसानों की संख्या घटकर आधी होने के कारण काफी सारे खरीदी केंद्रों को बंद करना पड़ सकता है। बताया गया कि इस साल करीब 50 से 55 खरीदी केंद्र ही बनाए जाएंगे, क्योंकि कई क्षेत्रों में किसानों ने खरीदी के लिए पंजीयन ही नहीं कराए हैं। ऐसे में जहां बीस-पच्चीस किसानों के पंजीयन हुए हैं उन्हें नजदीक केंद्रों पर मर्ज किया जा सकता है। वैसे भी शासन ने किसानों के लिए किसी भी केंद्र से उपज बेचने की छूट प्रदान कर दी है।

पिछले साल महज 44 हजार क्विंटल खरीदी
पिछले साल 2022 में समर्थन मूल्य पर 44 हजार क्विंटल गेहूं की खरीदी की गई थी। जो निर्धारित लक्ष्य के आधे से भी कम मात्रा थी। इस वजह से जिले में गेहूं का संकट खड़ा हो गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि राशन दुकानों से गेहूं का आवंटन नहीं किया जा रहा है। गेहूं के बदले में विगत एक साल से उपभोक्ताओं को महज चावल बांटा जा रहा है। अगर खरीदी को लेकर यही हालात रहे तो इस साल भी राशन दुकानों से गेहूं मिलना मुश्किल है। हालांकि सरकार ने गेहूं संकट को देखते हुए इस साल एमएसपी को बढ़ाकर 2125 रुपए तक कर दिया है। एमएसपी में 110 रुपए तक की वृद्धि की गई है। ताकि किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचे।

इनका कहना
किसानों के पंजीयन की संख्या पिछले साल से घटकर आधी हो गई है। ज्यादातर किसानों ने पंजीयन ही नहीं कराया है। इस वजह से खरीदी केंद्रों की संख्या भी घटाना पड़ रही है।
- एके कुजूर, जिला आपूर्ति अधिकारी बैतूल

खेतों में अभी क्राप कटिंग चल रही है इसलिए प्रति हेक्टेयर उत्पादकता अभी तय नहीं हो सकी है। चाहे तो इस आधार पर उत्पादकता तय की जा सकती है।
- संजीव नागू, अधीक्षक भूअभिलेख विभाग, बैतूल