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आधी रात में पानी डाल बच्चियों को जगाता था अभिषेक, डर दिखा करता रहा दुष्कर्म

दुष्कर्म के आरोपी आया मीता के बेटे अभिषेक को भेजा गया जेल

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Houses run in this house from 2000 to 2006.

भोपाल. साईं विकलांग अनाथ आश्रम बैरागढ़ कलां से दुष्कर्म, प्रताडऩा के सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। तीन बच्चियों से दुष्कर्म करने वाला आश्रम की आया मीता का बेटा अभिषेक आधी रात मूक-बधिर बच्चियों के कमरे में घुस जाता था। सो रही अन्य बच्चियों की नींद नहीं खुले इसके लिए वह 'पसंदÓ की लड़की पर पानी के छींटे डाल उसे जगाकर बाहर लाता था। छत पर ले जाकर दुष्कर्म करता था। आश्रम में रहने वाले अपने मां-पिता का रौब दिखाकर आरोपी बच्चियों को डराता था। यह खुलासा आरोपी ने खुद पुलिस की पूछताछ में किया है। पुलिस ने उसे सोमवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में उसे जेल भेज दिया गया। एएसपी नीरज सोनी ने बताया कि पुलिस आश्रम की अन्य बच्चियों के बयान दर्ज करेगी। आशंका कि अन्य बच्चियां भी पीडि़त हो सकती हैं।

अभिषेक के डर से चादर में दुबकर सोतीं
साइन लैग्वेज टीचर श्रद्धा शुक्ला को पीडि़त बच्चियों ने बताया कि देर रात अभिषेक किस लड़की को लेकर छत पर गया है, उनके साथ क्या हो रहा, इसकी जानकारी आश्रम में रहने वाली सभी बच्चियों को हो जाती थी। डर की वजह से कोई लड़की किसी को कुछ नहीं बताती थीं। रात में जब अभिषेक आता था तो कई बच्चियां जागते हुए भी चादर ओढ़कर सोने का बहाना कर लेती थीं, ताकि वे बच जाएं।

देर रात आश्रम से बच्चियां की गई शिफ्ट
प्रशासन ने बैरागढ़ कलां के साईं विकलांग अनाथ आश्रम से सोमवार देर रात बच्चियों को अज्ञात जगह शिफ्ट कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पीले रंग की तीन बसें रात 8.30 से नौ बजे के बीच आश्रम पहुंची थी। जिन में उन्हें ले जाएगा। खजूरी थाना टीआइ पांडेय ने बताया कि उन्हें बच्चियों के शिफ्ट किए जाने की जानकारी नहीं है। ऐसा कुछ हुआ है तो सामाजिक न्याय विभाग ने किया होगा।
जिस दिन अवस्थी नहीं रहा, उसी रोज किया दुष्कर्म
आरोपी ने कबूला कि दिसंबर 2017 में वह पहली बार विदिशा की रहने वाली एक किशोरी को देर रात आश्रम के कमरे से उठाकर छत पर लेकर गया था। जहां, उसके साथ दुष्कर्म किया। वह हैवानियत के लिए उस दिन की तलाश में रहता था, जिस दिन आश्रम का संचालक एमपी अवस्थी आश्रम में नहीं रहता था।

लाखों की संपत्ति बना ली
90 के दशक से छात्रावास चला रहे एमपी अवस्थी की जीवनशैली चार साल में बदल गई। जिस के पास खुद का मकान ठीक कराने के पैसे नहीं थे वही एक एकड़ से अधिक पर बने छात्रावास का मालिक बन गया। लग्जरी चार पहिया गाड़ी में फर्राटा भरने लगा। 80 के दशक के आखिर में एमइएस से हवलदार की पोस्ट से रिटायर्ड अवस्थी की माली हालत अच्छी नहीं थी। उन दिनों उसने बैरागढ़ के सीटीओ में पुराना मकान खरीदा और छात्रावास शुरू कर दिया। पुराने मकान के आंगन में प्लास्टिक की चादर लगाकर जैसे-तैसे बच्चों को रखा। बच्चे रहते अवस्थी के छात्रावास में थे, लेकिन पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल में जाते थे। सन 2000 तक बच्चों की संख्या 20 का आंकड़ा पार कर गई तो रोड से दूसरी ओर पूजाश्री कॉलोनी में एक मकान किराए पर लेकर छात्रावास शुरू किया।

ऐसे बदल गए रंग
कॉलोनी के लोगों ने बताया कि सीटीओ और पूजाश्री कॉलोनी में छात्रावास चलाने के दौरान अवस्थी ने नंगे पैर चलने का व्रत लिया था, तब उसके पास ढंग की दोपहिया भी नहीं थी। 2005 में अचानक पता चला कि छात्रावास को बैरागढ़ कलां में सरकार से बड़ी जमीन मिल गई है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भूमि पूजन किया और डेढ़ दो साल में दो हजार वर्गफीट पर दो मंजिला आलीशान भवन बनकर तैयार हो गया। छात्रावास शिफ्ट होने के बाद एक बार वह सीटीओ आया तो पूरे माथे पर फैला तिलक लगाकर स्कार्पियो पर सवार था। उसने कॉलोनी में एक प्लाट और एक मकान खरीद लिया तब तक उसकी जीवनशैली बदल गई है, छात्रावास में कई कर्मचारी हैं तो वह बेहद आराम का जीवन जीने लगा है।

वल्लभ भवन में पदस्थ थी पत्नी, बेटे-बेटी सहित छोड़ा
अवस्थी की पत्नी और एक बेटा और बेटी भी थे, पत्नी वल्लभ भवन में पदस्थ थी। अवस्थी के छात्रावास शुरू करने के कुछ सालों में ही वह बेटे-बेटी सहित अवस्थी को छोड़कर चली गई। मोहल्ले वालों का कहना है कि बेटी की शादी हो गई वहीं बेटा बिजनेस करने लगा, लेकिन अवस्थी की हरकतों को देखकर पत्नी और बेटे-बेटी ने कभी उससे कोई संपर्क नहीं रखा।