
Jaggery
इंदौर। मकर संक्रांति पर्व और तिल-गुड़ का जिक्र नहीं किया जाए भला यह कैसे संभव है। जिस तरह होली-दिपावली पर्व पर बनने वाली मिठाई में से गुंजिया-चक्की को अलग नहीं किया जा सकता, उसी तरह मकर संक्रांति पर्व की खुशियों में तिल-गुड़ ही मिठास घोलता है, लेकिन व्यस्तता के चलते बेशक घरों में अब तिल के व्यंजन अपेक्षाकृत कम बनते हैं लेकिन तिल-गुड़ की मिठास के दिवाने अभी भी कई हैं और जिस शहर में स्वाद के साथ हर दिन नया प्रयोग होता हो वहां भला पारंपरिक व्यंजन कैसे पीछे रहे।
ऐसे ही दो प्रयोग तिल-गुड़ से बनने वाली गजक में हुए। बड़ों को टिक्कड़ गजक का तोहफा मिला तो बच्चों के लिए चाको डिलाइट गजक की सौगात मिली। जिसके शौकीन केवल शहर में ही नहीं बल्कि देश-विदेश में भी हैं और यहां से यह दोनों तरह की गजक निर्यात भी होती है।
दोगुना कूटा जाता है तिल
छावनी में 1965 से गजक बेचने वाले व्यापारी प्रमोद ने बताया कि इंदौरियों की पसंद को देखते हुए हर साल गजक में कई नवाचार किए जाते है और उनमें से ही टिक्कड़ गजक एक ऐसा नवाचार है जो स्वाद ही नहीं सेहत के लिए भी बहुत लाभदायक है। गोंद, लौंग, इलायची, सोंठ, जावित्री और जायफल डालकर तैयार होने वाली इस गजक के लिए तिल दक्षिण भारत से और गुड़ उत्तर प्रदेश से यहां मंगवाया जाता है। अन्य गजक की तुलना में इस गजक के लिए तिल को दोगुना कूटा जाता है और तिल की यही कुटाई इसे खस्ता बनाती है। इसलिए इसके निर्माण में वक्त भी दोगुना लगता है, लेकिन स्वाद के शौकीनों को कब वक्त की परवाह। टिक्कड़ की तरह नजर आने वाली यह मोटी गजक वास्तव में बहुत खस्ता होती है।
तिल-गुड़ का तालमेल बिठाकर बनाई जाती है गजक
इंदौरी हर काम में आगे होते है। गजक बच्चों को भी अपना दिवाना कैसे बना सकती है, इसका उत्तर तो चाको डिलाइट गजक खाकर ही मिल सकता है। विदेश की चाकलेट को भारतीय व्यंजन में कैसे तब्दिल करना है इसका शऊर तो कोई इंदौरियों से सीखे। सनीराज ने यह प्रयोग किया और व्हाइट और डार्क चाकलेट के साथ तिल-गुड़ का तालमेल बिठाकर गजक तैयार की। दोनों तरह की चाकलेट की परत के बीच देसी गजक को रखा और बच्चों के लिए खास तौर पर परोस दिया।
Published on:
16 Jan 2023 05:12 pm
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