
भोपाल। क्या आपको अक्सर पेट में दर्द, बुखार की शिकायत रहती है...तो जरा संभल जाएं! क्योंकि राजधानी समेत पूरे मध्यप्रदेश में हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। पूरे देश में मध्यप्रदेश हेपेटाइटिस के मामलों में नंबर दो पर है। जानें क्या है हेपेटाइटिस? इसके लक्षण जान कर तुरंत करें डॉक्टर से संपर्क...
बिहार नंबर वन तो एमपी दूसरे स्थान पर
हेपेटाइटिस से संक्रमित सबसे ज्यादा लोग बिहार में हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश का नंबर आता है। वायरस जनित इस रोग से संक्रमित लोगों की लगातार बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है।
ये फैक्ट जानकर हैरान रह जाएंगे आप
* मध्यप्रदेश में हेपेटाइटिस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 12,938 है।
* इतनी बड़ी संख्या ने हेपेटाइटिस सें संक्रमित मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या के मामले में देश के टॉप टू स्टेट्स में शामिल कर दिया है।
* इस मामले में बिहार पहले नंबर है, जबकि तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश का नाम है।
* वर्ष 2013 में प्रदेश में हेपेटाइटिस मरीजों की संख्या जहां 16141 थी, वहीं 2014 में यह 14055 थी। वहीं इस बार भी संख्या कुछ कम होकर 12,938 पर पहुंच गई है।
* एमपी गवर्नमेंट की ओर से जारी रिपोर्ट बताती है कि राज्य में हर साल 3000 मामले हेपेटाइटिस बी के सामने आते हैं।
* जबकि 500 मामले हेपेटाइटिस बी की स्टेज से आगे की गंभीर स्टेज यानी हेपेटाइटिस सी के आते हैं।
नजर नहीं आते लक्षण
* हेपेटाटिस वायरस सीधे लीवर पर अटैक करता है। यही कारण है कि शुरुआत होने के बावजूद इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। कुछ सामान्य लक्षणों को जानकर यदि सतर्कता बरती जाए, तो पीडि़त को सही समय पर उचित इलाज मिल पाता है।
* यदि कोई इस बीमारी से पीडि़त है, तो संक्रमित होने के करीब 10-20 साल के बीच लिवर डैमेज होने के बाद ही लक्षण नजर आते हैं, लेकिन तब तक स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है और इस स्थिति में लीवर ट्रांसप्लाट के अलावा और कोई उपाय नहीं रह जाता। ऐसे में मरीज की जान पर खतरा बना रहता है।
ये ब्लड टेस्ट जरूरी
हेपेटाइटिस की जांच के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट की सलाह देते हैं। सामान्य जांच के लिए डॉक्टर एचबी टेस्ट की सलाह देते हैं। यदि इस टेस्ट में वायरस डिटेक्ट होता है, तो आपको लीवर सोनोग्राफी के साथ ही एचपीडीएनए टेस्ट जरूरी हो जाता है।
चूंकी हेपेटाइटिस का वायरस सीधे लीवर पर अटैक करता है, इसलिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि वायरस ने आपके लीवर को कितना नुकसान पहुंचाया है। वहीं एचपीडीएनए टेस्ट यह बताता है कि आपके ब्लड की एक बूंद में वायरस की संख्या कितनी है। इस काउंटिंग के आधार पर ही आपका ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है।
तो बनता है लीवर कैंसर
हेपेटाइटिस वायरस लीवर को धीरे-धीरे डैमेज करता है। इसलिए इससे होने वाली प्रॉब्लम्स नजर ही नहीं आती। सामान्य लक्षणों में अक्सर पेट दर्द, बुखार, उल्टी जैसे लक्षण नजर आते हैं। लेकिन जब तक शरीर में पीलापन, आंखों में पीलापन नजर आता है, पेशाब का रंग काला होने लगता है, तब तक स्थिति लीवर कैंसर की स्टेज तक पहुंच चुकी होती है। इस स्थिति में डॉक्टर के पास लीवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम ऑप्शन रहता है।
नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक...
नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक लोग हेपेटाइटिस वैक्सीनेशन को लेकर ज्यादा जागरूक नहीं है। यदि लोग जागरूक रहें तो परिवार का हर सदस्य इस वायरस से सुरक्षित रहेगा, तो देशभर में इसके मामलों में कमी लाई जा सकेगी।
एनएफएचएस की सर्वे रिपोर्ट कहती है...
* 12-23 महीने के 56.3 फीसदी शिशु ही हेपेटाइटिस बी की वेक्सीन ले पाते हैं।
* शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 64.3 तो ग्रामीण क्षेत्रों में 53.4 फीसदी ही है।
* भोपाल में 57.2 फीसदी ही इस वेक्सीनेशन का लाभ ले रहे हैं।
जरूर लगवाएं वैक्सीन
केंद्र और राज्य सरकारें हेपेटाइटिस जैसे गंभीर रोगों से निपटने के लिए काफी प्रयास कर रही हैं। समय-समय पर आयोजित कार्यशालाओं और जागरुकता अभियान के साथ ही वैक्सीनेशन जैसे प्रोजेक्ट शुरू कर इस पर नियंत्रण की कोशिश की जा रही है। लोग इसे लेकर गंभीर हों और यदि वैक्सीनेशन नहीं करवाया है, तो डॉक्टर की सलाह से आज और अभी ही करवाएं।
'फाइब्रोस्केन' टेस्ट के बाद यहां तुरंत मिलेगी रिपोर्ट
हमीदिया अस्पताल में 28 जुलाई को वल्र्ड हेपेटाइटिस डे के अवसर पर पिछले साल एक लेटेस्ट डायग्नोस्टिक फेसेलिटी शुरू की गई थी। इस व्यवस्था के तहत 'फाइब्रोस्केन' टेस्ट किया जाता है। यह ऐसा टेस्ट है, जो फाइब्रोसिस या फेटी लिवर का पता लगाएगा। इस टेस्ट के लिए अल्ट्रासाउंड का प्रयोग किया जाता है, ताकि जल्द रिजल्ट मिल सकें। यह नॉन इन्वेसिव तो है ही, वहीं आसानी से होने वाले इस टेस्ट की रिपोर्ट भी तुरंत दे दी जाती है, ताकि रोगी का सही समय पर और उचित इलाज शुरू किया जा सके।
लाइफ स्टाइल में लाने होंगे थोड़े बदलाव
हेपेटाइटिस से पीडि़त व्यक्ति को इलाज के साथ ही लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव करने होते हैं। ताकि उसकी सेहत सुधर सके और वह किसी अन्य को संक्रमित न कर सके। हेपेटाइटिस का वायरस ब्लड के संपर्क में आने से फैलता है, आपको जानकर हैरानी होगी कि ब्लड की सूखी बूंद में भी यह वायरस सात दिन तक जिंदा रहता है। इसलिए चोट लगने या कटने, छिलने पर निकले ब्लड का निस्तारण करने में सावधानी बरतें। अपनी दैनिक जरूरतों की चीजों को अलग रखें। सुरक्षित यौन संबंध रखें। यौन संबंध से भी यह रोग फैलता है।
कहते हैं एक्सपर्ट
डॉ. विजन राय के मुताबिक हेपेटाइटिस वायरस बेहद खतरनाक है, लेकिन समय पर पहचान और उपचार इस वायरस को खत्म कर देते हैं। इसके संक्रमण के कारण...
* बच्चों में इम्यून सिस्टम कमजोर होना।
* असुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन।
* सबसे बड़ा कारण लोगों में जागरुकता की कमी है।
* संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध के कारण।
लक्षण
आमतौर पर मरीजों में इसके लक्षण नजर ही नहीं आते। पर कुछ मामलों में 90 दिन के औसत के भीतर ही लक्षण नजर आने लगते हैं। इन लक्षणों में...
* अक्सर बुखार आना।
* भूख में कमी।
* कमजोरी महसूस होना, थकान।
* पेट में दर्द।
* जोड़ों में दर्द।
* उल्टी।
* यूरीन का रंग काला होना।
* हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर का रंग पीला होना।
* आंखों और नाखूनों का रंग पीला होना।
* हालांकि ये लक्षण कई हफ्तों या फिर 6 महीने में भी नजर आ सकते हैं।
* ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण जब तक सामने आते हैं, तब तक स्थिति बहुत बिगड़ चुकी होती है।
Published on:
03 Aug 2017 10:42 am
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