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भोपाल। आर्य भट्ट फाउंडेशन ने साइंस सेंटर में एस्ट्रो क्विज शो के प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन सेरेमनी का आयोजन किया। एस्ट्रो शो क्विज शनिवार रात को आयोजित किया गया। इसमें चुनिंदा 45 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था। इनमें से 18 स्टूडेंट्स ने रैंक हासिल की है। क्विज के 24 साल के इतिहास में पहली बार किसी स्टूडेंट्स ने परफेक्ट 100 स्कोर किया है। सिलेक्टेड 18 स्टूडेंट इसरो, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, नैनीताल तारामंडल सहित देशभर की एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी में साइंटिस्ट से अंतरिक्ष विज्ञान की ट्रेनिंग लेंगे। स्टूडेंट्स सिलेक्ट करने के लिए प्रदेशभर में टेस्ट लिए गए। फस्र्ट फेज क्लियर करने वाले स्टूडेंट्स को भोपाल में खगोल और अंतरिक्ष विज्ञान की टे्रनिंग दी गई।
22 साल में 1.27 लाख स्टूडेंट दे चुके हैं परीक्षा
आर्यभट्ट फाउंडेशन के फाउंडर संजय गुप्ता के अनुसार 22 साल में 1.27 लाख स्टूडेंट्स इस एग्जाम में शामिल हो चुके हैं। हर साल 18 स्टूडेंट्स समर वैकेशन में अंतरिक्ष विज्ञान को समझने के लिए चार माह की ट्रेनिंग लेते हैं। सारा खर्च फाउंडेशन उठाता है। टेस्ट में टेलीस्कोप, सितारे, आकाक्ष से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। 3-3 ग्रुप में सभी अलग-अलग संस्थानों में ट्रेनिंग लेते हैं। प्रैक्टिल एग्जाम होने के कारण रात में स्टूडेंट्स को लाइव डेमो देना होता है।
साइंटिस्ट में टोका तो शुरू किया अभियान
संजय एसबीआई में मैनेजर हैं। संजय का कहना है कि 1991 बीएससी के दौरान नैनीताल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी गया। वहां साइंटिस्ट को पता चला कि मैं एमपी से हूं तो वापस कॉलेज जाने को कहा। 24 अक्टूबर 1995 में सूर्यग्रहण के दौरान एक साइंटिस्ट ने कहा कि मप्र के लोग इतने पिछड़े हैं कि सूर्य ग्रहण तक देखने बाहर नहीं निकल रहे। तभी से फैसला किया कि स्टूडेंट्स इस फील्ड के प्रति अवेयर करूंगा। उन्हें रिसर्चर बनने के लिए मोटिवेट करूंगा ताकि कोई मप्र के स्टूडेंट्स को बैकवर्ड न कहे। ये एग्जाम इतना फेयर होता है कि आज तक इसमें मेरा बेटा भी पास नहीं हो पाया।
टेस्ट देने के बाद बन गए वॉलेंटियर
हर्षित दुग्गल 1996 में हुए पहले क्वीज के थर्ड रैंक विनर थे। अब वे इस ग्रुप के मेंबर है। हर्षित इंडियन आर्मी में फ्लाइट कैडेट के रूप में सिलेक्ट हुए, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें क्वीट करना पड़ा। हर्षित बताते हैं कि ग्रुप में 32 मेंबर है। वहीं, 1500 स्टूडेंट्स जुड़े हैं। क्वीज में शामिल हो चुके स्टूडेंट्स ही इस शो के लिए फंड में मदद करते हैं।
एग्जाम में मुझे फस्र्ट रैंक मिला है। मैं बड़ा होकर एस्ट्रोनॉमी फील्ड में जाना चाहता हूं। एग्जाम के सवाल पर मैंने बताया कि सोलर फिल्टर लाइट की इंटेनसिटी कम करता है। इस कारण हम इसे आंखों से देख पाते हैं।
अद्वैत जैन, भोपाल
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एग्जाम में मुझे 9वीं रैंक मिली है। मैं बड़ा होकर कास्मोलॉजिस्ट बनकर यूनिवर्स की स्टडी करना चाहता हूं। चौथे टर्म में मैं सिलेक्ट हो पाया हूं। एग्जाम के सवाल पर मैंने बताया कि गेलेलियन रिफ्लेक्टर पर फिल्टर लगाकर हम सूरज को नग्न आंखों से देख पाते हैं।
देव्यांशु पचौरी, ग्वालियर
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मुझे एग्जाम में 21वीं रैंक मिली है। मैं बड़ा होकर फाइटर पायलेट बनना चाहता हूं। एग्जाम में मुझसे मार्स के दो चंद्रमा फोबोस और डिमोस के बारे में पूछा गया। एग्जाम के लिए मैंने टेलीस्कोप की मदद से जाना कि अंतरिक्ष अब भी हमारे लिए अबुझ पहेली है।
अविनेश्वर सिंह चौहान, मंदसौर
Published on:
25 Dec 2018 01:02 pm
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