
मां को मिला बेटे से मिलने का हक
भोपाल. मध्यप्रदेश में कुपोषण पर नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं। अभी पोषण आहर सप्लाय करने वाली कंपनियों का विवाद थमा भी नहीं था कि अब इसकी वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। महिलाओं-बच्चों को पोषण आहर वितरण करने की व्यवस्था पर लांची (बालाघाट) से कांग्रेस विधायक हिना लिखीराम कावरे ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिख कर कहा हैं कि पोषण आहर बांटने का दायित्व महिला एवं बाल विकास अधिकारियों को दिया गया है, जबकि कुपोषण से यदि किसी बच्चे की मौत होती हैं तो इसका ठीकरा कलेक्टरों पर फोड़ा जाता है।
महिला बाल विकास विभाग का पूरा अमला एेसी घटनाओं से बच निकलता है, जबकि पोषण आहर का पूरा दायित्व महिला बाल विकास विभाग के अमले का होता है। कावरे ने सुझाव दिया है कि कलेक्टरों के अधिकार और दायरा अधिक होता है, एेसे में पोषण आहर बांटने का जिम्मा भी कलेक्टरों को दिया जाना चाहिए।
इससे न सिर्फ पोषण आहर वितरण व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि निगरानी से लेकर वितरण प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आएगी। एेसा करने से कुपोषण का स्तर काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कुपोषण से होने वाली मौत का जिम्मेदार कलेक्टर हैं तो पोषण आहर बांटने की जिम्मेदारी भी कलेक्टर को दी जाना चाहिए, इससे कलेक्टर ज्यादा प्रभावी तरीके से कुपोषण पर काम करेंगे।
जिलों को बजट देने व टेंडर निकालने का दिया सुझाव
जिलों में पोषण आहर की आवश्यकता अनुसार जिला कलेक्टरों को बजट देकर पोषण आहर के टेंडर से आपूर्ति और बांटने का काम दिया जाए तो इस पर प्रभावी तरीके से काम होने लगेगा। कलेक्टरों का जिलेभर में अमला होने से इसे हितग्राही तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इससे संबंधित शिकायतें यदि कलेक्टरों तक सीधे पहुंचेगी तो इसका क्रियान्वयन भी अच्छे से होने लगेगा।
दोहरी व्यवस्था से नहीं मिल रहे अच्छे परिणाम
हिना का कहना है कि पोषण आहर मप्र के लिए गंभीर समस्या है। इससे निपटने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर इसमें परिवर्तन बहुत कम नजर आ रहे हैं। इसके सप्लाय, वितरण, निगरानी, सैंपलिंग आदि की अलग-अलग व्यवस्था है जिससे जिला स्तर और इससे नीचले स्तर पर पोषण आहर वितरण और निगरानी की कड़ी कमजोर हो रही है। इस कड़ी को मजबूत करने से कुपोषण पर काफी नियंत्रण लाया जा सकता है।
कुपोषण की स्थिति बेहद खराब है। इससे हमारे संपूर्ण मध्यप्रदेश की छवि खराब हो रही है। इसे दूर करने के लिए सरकार प्रयास तो कर रही लेकिन वितरण व्यवस्था सुदृढ़ की जाना चाहिए। कलेक्टर का अमला और दायरा अधिक होता है, अधिकार भी अधिक होते हैं। इसलिए वितरण कलेक्टरों के माध्यम से करवाया जाना चाहिए। मैंने सुझाव दिया है, इस पर अब तक क्या अमल किया इसकी जानकारी नहीं आई है, लेकिन अमल करना चाहिए।
हिना लिखीराम कावरे, विधायक, लांजी, बालाघाट
कलेक्टर की निगरानी में ही महिला बाल विकास विभाग का अमला काम करता है। जिला स्तर से पोषण आहर की टेंडर, बजट, वितरण आदि यह नीतिगत विषय है। इस विषय पर नीतिगत फैसला शासन लेती है।
जेएन कंसोटिया, प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग
Published on:
03 Jun 2018 08:42 am
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