
भोपाल। शहर में होली पर्व की तैयारी शुरू हो गई है। शुक्रवार से होलाष्टक शुरू होने के साथ ही कई जगहों पर होली का डांडा गाड़ा गया। इस डांडा के गाडऩे के साथ ही त्योहार की मस्ती शुरू हो जाती है। हालांकि वक्त के साथ परंपराएं बदल रही हैं। पहले यह त्योहार महीने भर मनाया जाता था, लेकिन अब दो दिन का ही बनकर रह गया है। परंपराओं के अनुसार होली का डांडा एक महीने पहले ही माघ की पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में गाड़ा जाता था, जिसके बाद से होली का आगाज हो जाता था। आज भी यह परंपरा कई जगहों पर निभाई जाती है। जिस स्थान पर होली का दहन करना होता है, वहां एक बड़ा सा डांडा लगाया जाता है। यह डांडा भक्त प्रहलाद का प्रतीक होता है।
चंदा जमा कर रहे बच्चे
शहर में डांडा गडऩे के साथ ही होलिका दहन के लिए चंदा उगाहने का काम शुरू हो गया। बच्चों-युवाओं की टोलियां चंदा व होलिका में दहन किए जाने वाले सामान जुटाने लगे।
कंडों की होली के लिए कर रहे अपील
श हर में होलिका दहन के साथ ही पर्यावरण को बचाने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। लोग त्योहारों के साथ पर्यावरण के लिए भी आगे आ रहे हैं। इसके तहत कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने कंडों की होली जलाने का निर्णय लिया है। साथ ही कई मोहल्लों में एक ही स्थान पर होलिका दहन की पहल की जा रही है। इसके लिए नवयुवक हिन्दू उत्सव समिति नया भोपाल की ओर से पम्पलेट वितरण किया गया। इसके साथ ही जागरुकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसी प्रकार गायत्री शक्तिपीठ युवा प्रकोष्ठ की ओर से भी कंडों की होली जलाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही लोगों को लागत मूल्य पर गाय के गोबर के कंडे भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
हर्बल रंगों से खेलें होली
होली को खुशनुमा बनाने के लिए आर्टिफिशियल (रासायनिक) रंगों से बचना चाहिए। इससे त्वचा को काफी नुकसान पहुंचता है। ये रंग इतने खतरनाक होते हैं कि इनसे जान भी जा सकती है। कई संस्थाएं लोगों को हर्बल होली के लिए जागरूक कर रहे हैं। ज्ञान विज्ञान समिति के अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि वे हर बार की तरह इस बार भी लोगों को हर्बल रंगों के पैकेट बांटेंगे, ताकि रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से बच सकें।
Published on:
24 Feb 2018 08:43 am
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