
hyperbaric oxygen therapy
भोपाल. भोपाल बदल रहा है। बड़े शहरों के ट्रेंड को राजधानीवासी भी फॉलो कर रहे हैं। हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी लेते हुए सोशल मीडिया पर अभिनेता अनिल कपूर, अनुपम खेर समेत कई सेलेब्रिटी के वीडियो वायरल होने पर पत्रिका ने शहर के युवाओं का मिजाज जानने की कोशिश की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। पता चला शहर के तमाम युवा और उद्यमी भी इस थेरेपी के दीवाने हैं। हालांकि अभी शहर में यह ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध नहीं है इसलिए तरोताजा होने के लिए इंदौर, लखनऊ और दिल्ली जा रहे हैं।
हो जाता हूं तरोताजा
हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी से शरीर के कोने-कोने तक ऑक्सीजन पहुंचती है। शरीर के सभी अंग अपनी पूरी शक्ति से काम करते हैं। बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है। व्यापार के सिलसिले में अक्सर दिल्ली जाना पड़ता है। मौका मिलते ही यह थेरेपी लेता हूं।
देव आहूजा, कोहेफिजा
रक्त संचार बेहतर
डॉक्टरों ने बताया है कि थेरेपी से नई ब्लड वेसेल यानी रक्त नलिकाएं बनने में मदद मिलती है। रक्त संचार बेहतर होता है। स्टेम सेल की तादाद और उनकी एक्टिविटी भी बढ़ती है। परिवार लखनऊ में रहता है। जब भी घर जाता हूं थेरेपी लेता हूं।
शिवम अग्रवाल, अरेरा कालोनी
क्या है हाइपरबेरिक थेरेपी
हाइपरबेरिक थेरेपी में सिर्फ ऑक्सीजन के जरिए कई बीमारियों को ठीक या प्रबंधित किया जाता है। करीब 3.5 करोड़ की खास मशीन से थेरेपी लेने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। हाइपरबेरिक चैंबर में एक घंटे के सत्र का करीब 4 हजार खर्च आता है।
एक्सपर्ट
डॉक्टर बोले-गंभीर बीमारियों में लाभकारी
गांधी मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जन प्रो.डॉ. आईडी चौरसिया बताते हैं कि इस थेरेपी से चोट, दर्द या कुछ बीमारियों में मरीज को ऑक्सीजन की मदद से लाभ मिलता है। हालांकि यह थेरेपी लेने की सलाह तब दी जाती है जब दवाएं काम नहीं करती हैं। जिन्हें कैंसर, हृदय की बीमारी, मधुमेह, डायबेटिक फूट, मस्तिष्क में संक्रमण, अंधत्व, सुनने में दिक्कत, एनीमिया, स्ट्रोक आदि है, उनके लिए भी यह थेरेपी फायदेमंद है।
बूढ़े होने की रफ्तार करती है धीमी
उम्र बढऩे के पीछे डीएनए में मौजूद टेलोमेयर प्रमुख कारण होता है। ऑक्सीजन और न्यूट्रीशन शरीर में मौजूद ब्लड सेल्स को जीवित रखते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे ब्लड सेल्स की कार्य करने की क्षमता कम होती जाती है। शरीर बूढ़ा होने लगता है। ऐसे में इस थेरपी में प्रेशर के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है। तब शरीर के रेड सेल्स सक्रिय हो जाते हैं। खून के अंदर के प्लाज्मा होता में ऑक्सीजन पूरी तरह से घुल जाती है। शरीर के हर कोने में ऑक्सीजन पहुंचने से पुरानी सेल्स ठीक हो जाती हैं। नई सेल्स बन जाती हैं। त्वचा के साथ ही शरीर के अंदर के सभी हिस्से एक्टिव हो जाते हैं। इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता।
Published on:
01 May 2023 11:32 pm
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