
मोदी के नियत पर सवाल उठाकर चर्चा में आई थी यह IAS, अब बोलीं- आदिवासी बच्चों को सिखाओ अंग्रेजी
भोपाल. कभी पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान के खिलाफ लेख लिखकर सुर्खियों में आईं सीनियर आईएएस दीपाली रस्तोगी एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। इस बार दीपाली स्तोगी ने आदिवासी बच्चों को जेंटलमैन बनाने का फरमान जारी किया है। दीपाली ने आदिवासी हॉस्टलों में रहने वाले बच्चों के लिए इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स शुरू करना अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करना है।
पीएम मोदी के शौचालय योजना पर उठाया था सवाल
दीपाली स्तोगी ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच से मुक्ति के लिए चलाए गए कार्यक्रम को औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त बताया था। उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखते हुए, खुले में शौच (ओडीएफ) अभियान को औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त करार दिया। उन्होंने लिखा "यह योजना उन गोरे लोगों के कहने पर लाई गई, जिनकी वॉशरूम हैबिट भारतीयों से अलग है। अगर गोरे कहते हैं कि खुले में शौच करना गंदा है तो हम इतना बड़ा अभियान ले आए। ग्रामीण अगर टैंक खुदवाकर शौचालय बना भी लें तो उसमें लगने वाला पानी कहां से लाएंगे। ग्रामीणों को पानी के लिए लंबा फासला तय करना पड़ता है। इतनी मेहनत से अगर कोई दो घड़े पानी लाता है तो क्या वह एक घड़ा टायलेट में डाल सकता है? उन्होंने अपने लेख पर लिखा था कि खुले में शौच मुक्त अभियान का पूरा कांसेप्ट आयातित है।
आईएएस अधिकारियों पर भी बोला था हमला
मध्यप्रदेश सरकार की आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी ने सरकारों के साथ-साथ आईएएस बिरादरी पर भी हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि आईएएस अफसर सिर्फ डिनर पार्टियों और रियायती छुट्टियों तक सिमटकर रह गए हैं। उन्हें ताकत चाहिए तो सिर्फ अपने चहेतों और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए। उन्होंने लिखा था कि आज एक आईएएस अधिकारी की सबसे बड़ी काबिलियत ही यही हो गई है कि वह अपने राजनीतिक आका के मुंह से शब्द निकलने से पहले उसके हिसाब से काम करना शुरू कर दे। सबसे अच्छा अधिकारी वो हो गया है, जिसकी अपनी कोई राय ही न हो। कुल मिलाकर नौकरशाही और राजनीति के बीच की लाइन, सही और गलत, सच्चाई और झूठ की ओर झुकती जा रही है। ऐसे में एक आईएएस अधिकारी सरकार चलाने के लिए अपने सभी मूल विचारों को खो देता है।
अब आदिवासी बच्चों को इंग्लिश पढ़ाने का फरमान
आदिम जाति कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने इसकी गाइडलाइन जिला कलेक्टरों और इन स्कूलों को भेज दी है। इसमें आदिवासी बच्चों को इंग्लिश स्पीकिंग, रेमेडियल क्लास और गुड-बिहेवियर रूल्स को लेकर फोकस किया गया है। इसके अलावा जो बच्चे शैक्षणिक तौर पर किसी विषय विशेष में कमजोर हैं, उनके लिए संबंधित विषय की अतिरिक्त कोचिंग कराने के लिए निर्देश दिए हैं। 10वीं और 12वीं के कमजोर बच्चों के लिए भी अतिरिक्त क्लास लगाना अनिवार्य किया है। इसमें उन विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन विषयों में पूरक मिली हो। इसमें गणित और विज्ञान को विशेष तौर पर महत्त्व देना होगा।
शैक्षणिक टूर भी प्लान होंगे
आदिवासी शैक्षणिक संस्थानों के बच्चों को दूसरे स्कूलों के शैक्षणिक टूर कराने के प्लान तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें जिलों के बेस्ट स्कूलों में बच्चों को टूर पर ले जाने के लिए कहा है। राज्य स्तर पर भी प्रोग्राम तैयार किया जाएगा। दीपाली ने बच्चों का हेल्थ कार्ड बनाना भी अनिवार्य कर दिया है। इसमें बच्चे की पूरी केस हिस्ट्री रहेगी। खास ये कि बच्चे के प्रवेश के तुरंत बाद यह हेल्थ कार्ड बनाना होगा, ताकि उसे कोई बीमारी या परेशानी होने पर उसके इलाज में देरी न हो। हर महीने नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी करना होगा। साथ ही साफ-सफाई और वातावरण को लेकर अन्य पैमाने का पालन करने के लिए कहा है।
Published on:
31 Jul 2019 01:23 pm
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