
ias officer neha marvya case - image patrika.com
neha marvya : एमपी के ट्राइबल विभाग में 'पेन डाउन' के बाद आइएएस नेहा मारव्या फिर चर्चा में आ गई हैं। विभागीय कर्मचारियों, अधिकारियों ने उनपर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आइएएस नेहा मारव्या का विवादों से पुराना नाता है। एक बार वे एमपी के पूर्व सीएम शिवराजसिंह के करीबी अधिकारी से भिड़ गई थीं। आइएएस नेहा मारव्या ने एक कलेक्टर की गाड़ी का बिल रोक दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने तत्कालीन सीएस के करीबी रहे एक अधिकारी की भी जांच शुरू कर दी थी। विवादों की वजह से ही 8 माह में ही उनकी कलेक्टरी छीन ली गई थी।
जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को एक बैठक के दौरान नेहा मारव्या ने अपर संचालक स्तर की 2 महिला अधिकारियों के साथ अभद्रता कर उन्हें बाहर निकाल दिया। प्रदेशभर के विभागीय कामों की माप पुस्तिका जैसी जानकारियां तीन घंटे के अंदर मांगी जाती हैं। नहीं देने पर धमकाया जाता है। सौ से अधिक अधिकारियों का इंक्रीमेंट नहीं लगाया।
अधिकारियों ने आरोप लगाया कि नेहा मारव्या ने अपने पास पांच कारें लगा रखीं हैं, विभागीय बजट से अपना खर्च किया जा रहा है। कर्मचारियों की चाय तक बंद करा दी जबकि खुद दिनभर पांच से छह नारियल पानी पीती हैं।
2011 बैच की आइएएस अधिकारी नेहा मारव्या शुरु से विवादों में रहीं हैं। उन्होंने आईएएस एसोसिएशन के ग्रुप में एक पोस्ट डालकर कलेक्टर नहीं बनाने पर मायूसी जाहिर की। इसके बाद नेहा मारव्या को डिंडोरी का कलेक्टर बनाया गया था। लेकिन वहां पूर्व मंत्री ओपी धुर्वे और अन्य नेताओं से विवाद के चलते 8 माह में ही उन्हें हटा दिया गया।
2017 में नेहा मारव्या शिवपुरी जिला पंचायत की सीईओ थीं। उस समय उन्होंने शिवपुरी कलेक्टर की सफारी गाड़ी का बिल रोक दिया था।
तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के करीबी पीएस मनीष रस्तोगी पर भी नेहा ने बड़ा आरोप लगाया था। रस्तोगी राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव थे तब नेहा ने कहा था कि पीएस ने उन्हें गेट आउट कहकर निकाल दिया।
राज्य रोजगार गारंटी परिषद की एडिशनल सीईओ रहने के दौरान नेहा मारव्या ने वन विभाग के सीसीएफ पद से रिटायर हुए ललित बेलवाल के खिलाफ जांच शुरू कर एफआइआर के निर्देश दिए थे। बेलवाल कथित रूप से तत्कालीन मुख्य सचिव के करीबी थे। उन पर भर्ती में फर्जीवाड़ा का आरोप था।
Updated on:
15 Aug 2026 07:24 am
Published on:
15 Aug 2026 07:23 am
