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थाने के पास का एटीएम तोड़ा और ले गए 13 लाख रुपए, पुलिस बेखबर!

बैंक के मुंबई मुख्यालय में अलार्म बजने से वारदात का खुलासा हुआ, वारदात को अंजाम देने के लिए डेढ़ घंटे तक अंदर रहा बदमाश।

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ATM Machine Cash Robbery in bhopal

भोपाल। पिपलानी पेट्रोल पंप चौराहे के पास आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम से बदमाश ने 13 लाख 15 हजार आठ सौ रुपए निकाल लिए। बदमाश ने पहले एटीएम का हुड तोड़ा, फिर सेफडोर (एटीएम की तिजोरी) का पासवर्ड डालकर डायनर लॉक खोला। बैंक के मुंबई मुख्यालय में अलार्म बजने से वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि वारदात को शुक्रवार रात साढ़े ग्यारह बजे से एक बजे के बीच अंजाम दिया गया है। पुलिस शनिवार सुबह बैंक अधिकारियों के साथ एटीएम पहुंची। पुलिस को करंसी कैसेट में सौ-सौ के छह नोट मिले।

11.35 बजे आया, 1.06 बजे निकला :
पिपलानी पुलिस ने बताया कि एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे में ट्रैक शूट पहने हुआ बदमाश कैद हुआ है। वह रात करीब 11.35 बजे एटीएम में दाखिल हुआ और शटर गिराकर लाइट बंद कर ली। वह रात करीब 1.06 बजे बाहर निकला। रायटर सेफगार्ड कंपनी के कर्मचारी राकेश कुमार ने पुलिस को शिकायत की है।

डेढ़ घंटे में किसी को कुछ पता नहीं चला :
एटीएम पिपलानी पेट्रोल पंप के पास है। पंप 24 घंटे खुला रहता है। वहीं, चौराहे पर पुलिस के जांच प्वाइंट और चौकी है। 100 कदम दूर पिपलानी थाना है। इन सबके बावजूद किसी को भनक तक नहीं लगी, जबकि वह डेढ़ घंटे तक एटीएम के अंदर रहा।

सुबह छह बजे मिली सूचना :
आईसीआईसीआई भोपाल शाखा के मैनेजर को सुबह छह बजे मुंबई मुख्यालय से चोरी की जानकारी मिली। एटीएम का सिक्योरिटी फीचर सही नहीं होने की वजह से इतनी देरी से सूचना मिलने की बात जांच में सामने आई है।

कर्मचारियों पर शक :
पुलिस ने बताया कि एटीएम में कैश आपरेट का काम रॉयटर सेफ गार्ड कंपनी कर रही है। एटीएम में पैसा डालने सेफडोर का पासवर्ड कंपनी के कर्मचारियों को ही पता होता है। पासवर्ड छह अंकों का होता है।

तीन अंक एक और तीन अंक दूसरे कर्मचारी को पता होते हैं। हमेशा दो कर्मचारी रकम डालने जाते हैं। ऐसे में पुलिस को कंपनी के वर्तमान, पूर्व कर्मचारियों पर शक है।

इधर,रेरा में सीबीडी पर डेढ़ घंटे चली बहस :-
गेमन इंडिया के टीटी नगर स्थित सीबीडी प्रोजेक्ट पर शनिवार को डेढ़ घंटे की बहस के बाद पुराने अनुबंध की स्थिति पर मामला उलझ गया। सीबीडी के वकील सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने 2014 के अनुबंध का हवाला देते हुए बताया कि अनुबंध में समयसीमा की कोई बात नहीं है।

सीबीडी आवंटियों के वकील अजय गुप्ता में केंद्र के नियम का हवाला देते हुए अधिकतम तीन साल में प्रोजेक्ट को पूरा करने की बात रखी। अब 28 को फिर बहस होगी। सीबीडी द्वारा पूरी राशि लेने के बावजूद फ्लैट आवंटन के लिए 2019 तक और इसके बाद पजेशन देने की बात रेरा को कही थी। आवंटियों ने रेरा में मामला दर्ज कराया था।

यहां का निर्णय देश के लिए बनेगा नजीर :
ऑनगोइंग प्रोजेक्ट के पुराने अनुबंध रेरा आने के बाद कितने लागू होंगे, ये निर्णय तय करेगा। अभी देशभर में यह पुरानी शर्तों पर ही चल रहे हैं। यदि पुराने अनुबंध को बनाए रखा तो उपभोक्ताओं समय पर प्रोजेक्ट मिलने में दिक्कत आ सकती हैं। यदि पुराने अनुबंध रद्द किए जाते हैं, तो भी विवाद बढऩे के साथ ही बिल्डर को बड़ा नुकसान हो सकता हैं।

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