
भोपाल। शहर के व्यावसायिक क्षेत्र के अधिकांश कब्रिस्तान अपना अस्तित्व ही खोने की कगार पर पहुंच गए हैं। इनमें मुल्कन बी सिंधी कॉलोनी, भदभदा, और हलाल पुरा जैसे कब्रस्तान हैं। इनमें न बाउंड्री शेष रह गई और न ही कोई इंतजाम हैं। अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाए तो इनका हाल भी बाकी 90 प्रतिशत कब्रिस्तानों की तरह हो जाएगा।
जिनका अब नामोनिशान भी नहीं रहा। शब-ए-बरात के चलते इन कब्रिस्तानों को बचाने के लिए महापौर से गुहार लगाई गई। जमीअत उलमा मध्यप्रदेश के कब्रिस्तान बचाओ एवं सफाई अभियान के तहत अतिक्रमण हटाने के साथ इनमें सफाई और रोशनी के इंतजाम की मांग की गई है। एक मई को शब-ए-बरात है। इस मौके पर दुनिया से जा चुके लोगों की कब्रों पर पहुंच उनके परिजन दरूद और फातिहा पढऩे पहुंचेंगे। इस बीच कब्रिस्तानों में अव्यवस्था और अतिक्रमण से समस्या खड़ी होगी।
जमीयत उलेमा के हाजी मोहम्मद इमरान ने बताया कि शहर में पहले करीब दो सौ कब्रिस्तान थे। इनमें लगभग 90 फीसदी अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए। शेष जो बाकी हैं उनके भी हाल खराब हैं। जमीअत के प्रधिनिधिमंडल ने महापौर पंचायत में पहुंच शब-ए-बरात से पहले इनमें इंतजाम की मांग की है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से यहां बिजली पानी और दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर मांग की गई हैं।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
पदाधिकारियों के मुताबिक प्रमुख रूप से मुल्कन बी सिंधी कॉलोनी, भदभदा, और हलाल पुरा जैसे कब्रस्तान हैं जिनकी सुरक्षा समय रहते की जानी चाहिए। गेंहूखेड़ा कोलार कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल खड़ी करने में बाधांए उत्पन्न की जा रही हैं। सुधार को लेकर कई बार शिकायत करने पर भी जनप्रतिनिधि और निगम अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में हाजी मोहम्मद इमरान, हाफिज इस्माइल बेग, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद उवैस, फईमउद्दीन, परवेज़ भाई, पीरज़ादा तौकीर निज़ामी सहित कई पदाधिकारी शामिल थे।
- खत्म होने की कगार पर कब्रिस्तानों को बचाने गुहार
- महापौर पंचायत में सौंपा ज्ञापन,
- शब-ए-बरात से पहले इंतजाम सुधारने की मांग
- नहीं है कब्रिस्तानों में रोशनी और बिजली पानी के इंतजाम
Published on:
23 Apr 2018 09:27 pm
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