13 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकार से ‘सब्सिडी’ चाहिए तो पालनी होगी गाय या भैंस ! नई गाइडलाइन जारी

Kamdhenu Scheme 2025: पशुपालन विभाग ने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना की नई गाइडलाइन जारी कर दी है।

2 min read
Google source verification
Kamdhenu Scheme 2025

Kamdhenu Scheme 2025

MP News: एमपी सरकार से सब्सिडी लेनी हो तो गाय पालना पड़ेगी या भैंस। दोनों एक साथ पालने पर आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। ऐसा भी नहीं चलेगा कि कुछ गाय एक ब्रीड की और कुछ दूसरी ब्रीड की हों। भैंस भी एक ही ब्रीड की होनी चाहिए, तभी बात बनेगी। ये शर्तें एक यूनिट के लिए होंगी। हितग्राही ऐसी आठ यूनिट तक का लाभ ले सकेंगे, जिसमें पशुओं के प्रकार बदल सकेंगे, ब्रीड में भी बदलाव करने की छूट होगी।

पशुपालन विभाग ने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना की नई गाइडलाइन जारी कर दी है। उसी में ये शर्तें शामिल हैं, जो प्रति इकाई पर लागू होंगी। प्रत्येक यूनिट में न्यूनतम 25 दुधारू पशु होने चाहिए। देशी गाय की नस्ल वाली एक यूनिट लगाने में 36 लाख और संकर गाय-भैंस की यूनिट लगाने पर 42 लाख रुपए खर्च आएगा। सरकार उक्त लागत पर एसटी, एससी वर्ग के हितग्राही को प्रति यूनिट 33 फीसदी व अन्य वर्ग के हितग्राही को 25 फीसद सब्सिडी देगी।

कर्ज लेने की शर्तें

न्यूनतम तीन साल के लिए कर्ज, इस अवधि में ब्याज नहीं देना होगा। चाहें तो तीन साल से पहले कर्ज चुका सकेंगे। सातसाल में कर्ज चुकाना होगा।

यदि आवेदक के पास पट्टे की जमीन है तो उसके दस्तावेज सत्यापित होने चाहिए। फसल ऋण के समय नवीनीकरण कराने वालों को सत्यापन से छूट रहेगी।

ये भी पढ़ें: हाईकोर्ट ने 'दूसरी शादी' को लेकर सुनाया बड़ा फैसला…

ये हैं योजना की शर्तें

-सभी वर्ग को लाभ मिलेगा, एक आवदेन पर एक या अधिकतम 8 इकाई का लाभ ले सकेंगे।

-एक इकाई के लिए न्यूनतम 3.50 एकड़ जमीन जरूरी। अधिक लाभलेने प्रति इकाई के मान से जमीन चाहिए। जमीन अलग-अलग हो सकती है, लेकिन एक ही तहसील में।

-शामिल की जमीन होने पर अन्य मालिकों की सहमति जरूरी।

-पहले आओ, पहले पाओ के तहत चयन होगा। सहकारी दुग्ध संघों, उनसे जुड़ी समितियों समितियों में में दूध दूध बेचने वाले किसानों को प्राथमिकता।

-शासकीय संस्थान से पशुपालन का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य। पशुपालन में यूजी व पीजी तक पढ़ाई करने वालों को प्रशिक्षण की जरूरत नहीं।

-भारतीय मूल की देशी नस्लों में साहिवाल, गिर, थारपारकर, रेड सिंधी, संकर नस्लों में एचएफ, जर्सी, भैंसों में मुर्रा, भदावरी, सूरती, मेहसाना खरीद सकेंगे।

योजना में कई प्रावधान नए हैं, जो हर वर्ग के हितग्राहियों को साधने के लिए किए हैं। विषय केवल सब्सिडी का नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश में जैविक व प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की समग्र खांका है।- लखन पटेल, राज्यमंत्री