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शहर में रोजाना 8 टन पॉलीथिन की हो रही खपत

राजधानी में पॉलीथिन पर नहीं रोकटोक: न टीम बनी न कोई जिम्मेदार तय, छह माह से कार्रवाई नहीं

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शहर में रोजाना 8 टन पॉलीथिन की हो रही खपत

शहर में रोजाना 8 टन पॉलीथिन की हो रही खपत

भोपाल. निगम प्रशासन ने शहर में पॉलीथिन तो प्रतिबंधित कर दी है, लेकिन प्रतिबंध के आदेश को लागू कराने पुख्ता व्यवस्था नहीं की। स्थिति ये है कि बीते छह माह से पॉलीथिन को लेकर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। निगम प्रशासन ने इसके लिए कोई विशेष टीम तक नहीं बनाई है। एएचओ को ही पॉलीथिन नियम लागू करने का जिम्मा दिया है, लेकिन वो भी इस काम में रुचि नहीं ले रहे हैं। नतीजतन पूरे शहर में पॉलीथिन की खरीदी बिक्री धड़ल्ले से जारी है। बाजारों में, दुकानों पर पॉलीथिन में सामान दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार की गाइडलाइन व सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के आदेशों के बाद शहर में पॉलीथिन प्रतिबंधित की थी। इससे पर्यावरण को बढ़ते नुकसान को देखते हुए ऐसा किया गया। सिंगल यूज्ड प्लास्टिक भी प्रतिबंधित किया हुआ है। निगम प्रशासन ने तो बाकायदा आदेश जारी करके सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करने का दावा किया था। हैरानी ये है कि बावजूद इसके शहर में पॉलीथिन के प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करने टीम तक नहीं बनाई गई।

हकीकत एक नजर में
08 टन पॉलीथिन की खपत है भोपाल में रोजाना करीब
260 रोजाना टन कचरा प्लास्टिक का होता है
12 थोक दुकानें है प्लास्टिक की।
40 से अधिक छोटी दुकाने है

ये हो रहा नुकसान
लगातार जांच और कार्रवाई नहीं होने से पॉलीथिन विक्रय करने व उपयोग करने वाले पूरी तरह से बेखौफ हो गए हैं। उन्हें कार्रवाई का डर नहीं है, खुलेतौर पर आसानी से इसकी उपलब्धता हो जाती है। प्रतिबंधित पॉलीथिन खरीदी करने में किसी को कोई दिक्कत नहीं होती। पुराने शहर व नए शहर में इसके बड़े व थोक व्यापारी है। इन पर निगम प्रशासन ने बीते करीब एक साल पहले काफी बड़ी कार्रवाईयां की थी, जिससे दुकानों व बाजारों से पॉलीथिन कैरी बैग गायब होकर यहां कपड़े के थैले नजर आना शुरू हो गए थे। अब स्थिति फिर खराब हो गई है।

पॉलीथिन को प्रतिबंधित किया जा चुका है। निगम का स्वास्थ्य अमला कार्रवाई करता है। पॉलीथिन प्रतिबंध के आदेश पूरी तरह लागू कराए जाएंगे। कार्रवाई बढ़ाएंगे।
केवीएस चौधरी, निगमायुक्त