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जामा मस्जिद विवाद में संस्कृति मंत्री का अहम बयान, बोलीं- सत्य सामने आने पर करेंगे क्रियान्वयन

जामा मस्जिद विवाद में अब सरकार का आधिकारिक पक्ष भी सामने आ गया है

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जामा मस्जिद विवाद में सरकार का आधिकारिक पक्ष

भोपाल. भोपाल की जामा मस्जिद विवाद में अब राज्य सरकार का आधिकारिक पक्ष भी सामने आ गया है। इस मामले में राज्य की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर का बयान आया है. संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कहा है कि जामा मस्जिद के सर्वे की मांग की जाती है तो सरकार सर्वे कराएगए. इसके बाद जो सत्य सामने आएगा, उस पर क्रियान्वयन किया जाएगा।

भोपाल के चौक बाजार में जामा मस्जिद स्थित है जिसको लेकर विवाद छिड़ गया है। संस्कृति बचाओ मंच का दावा है कि यह मस्जिद दरअसल शिव मंदिर है। उर्दू की किताब 'हयाते कुदसी' में इसका जिक्र भी है। खास बात यह है कि किताब खुद मंदिर तोड़ने वाली महिला शासक भोपाल राज्य की परिवार की कुदसिया बेगम ने लिखी है. मस्जिद लाल रंग के पत्थरों से निर्मित यह मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद की तरह चार बाग पद्धति पर ही आधारित है।

अब जामा मस्जिद का पुरातात्‍विक सर्वेक्षण कराने की मांग उठ रही है. इसको लेकर हिन्दू व मुस्लिम पक्षों के बीच तकरार भी बढ़ती जा रही है। संस्कृति बचाओ मंच ने जामा मस्जिद का पुरातात्‍विक सर्वेक्षण कराने की मांग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से की थी। इसके जवाब में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी सहित अन्य अनेक मुस्लिम धर्म गुरुओं ने कहा मस्जिद में मंदिर मिलने के प्रमाण असत्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास सभी कागजात मौजूद हैं।
इसके बाद संस्कृति बचाओ मंच ने अपने पास उपलब्ध प्रमाण के आधार पर अदालत का दरवाजा खटखटाने का ऐलान कर दिया था। मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि मस्जिद में मंदिर होने के प्रमाण देने के लिए 114 साल पुराने कागजात एकत्रित किए जा रहे हैं। अदालत में चौक बाजार की जामा मस्जिद में मंदिर होने के पूर्ण प्रमाण होने के साथ ही याचिका लगाई जाएगी। इस मामले में ज्ञानवापी मस्जिद केस में हिन्दुओं के पक्षकार हरिशंकर जैन से भी सलाह ली जा रही है।

अब संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने साफ कह दिया है कि राज्य सरकार एएसआई से इसका सर्वे करा सकती है. बुधवार को मीडिया में दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद जो सच आएगा उसके हिसाब से क्रियान्वयन भी किया जाएगा।