
बुंदेलखंड की चार शैलियों में कॉमेडी दृश्यों के जरिए बताई ठग बाबाओं की हकीकत
भोपाल। नव नृत्य नाट्य संस्था की ओर से आयोजित 13वें भोपाल रंग महोत्सव के तहत शनिवार को हास्य नाटक ‘नैन नचैया’ का मंचन किया गया। नाटक लेखन सतीश दवे ने और निर्देशन राजीव अयाची ने किया। प्रस्तुति दमोह के युवा नाट्य मंच के कलाकारों ने दी। स्वांग शैली में हुए नाटक का शहर में पहली बार मंचन किया गया। इसमें बुंदेलखंडी लोक संगीत बधाई, ढिमरियाई और राई शैली का उपयोग किया गया। एक घंटे 25 मिनट के नाटक में २२ कलाकारों ने ऑनस्टेज अभिनय किया।
नाटक के माध्यम से ये मैसेज दिया गया कि हमारे समाज में कई ठग, बाबा बनकर भोली-भाली जनता से ठगी कर रहे हैं। एक राज्य में रहने वाला युवक पहाड़ से गिरकर खो जाता है। जब ये बात राजा अटकल पटकुंजी को पता चलती है तो वह सैनिकों को भेजकर उसकी तलाश कराता है। सैनिक उसे खोज नहीं पाते। राजा को बताया जाता है कि इसमें पड़ोसी देश का हाथ हो सकता है। पहाड़ के गिरने के कारण युवक की याद्दाश्त खो जाती है।
ठग बन जाता है युवक
इधर, युवक बाबा बन जाता है। वह लोगों को ठगने और महिलाओं से छेड़छाड़ करने लगता है। लोगों को ठगने और राज्य की हर महिलाओं को छेडऩे के साथ नैन मटक्का भी करता है। एक दिन वह महारानी से छेड़छाड़ कर देता है। उसे महारानी से प्रेम हो जाता है। सेनापति उसकी पिटाई कर देता है और उसकी याददाश्त वापस आ जाती है।
रेल गरियाने का सबसे अच्छा माध्यम
पूर्व रंग में व्यंग्य लेखक मलय जैन ने भारतीय रेल और गरियाने की परंपरा विषय पर व्यंग्य पाठ किया। उन्होंने रचना पेश करते हुए पढ़ा कि सफर के दौरान गरियाने के लिए रेल से अच्छा कुछ नहीं होता। आप गरियाने की कला में थोड़ा भी निष्णात है तो स्टेशन के बाहर गाडिय़ों की रेलमपेल से लेकर जीएसटी लगाने तक पर गरिया सकते हैं। हम भी रेलवे को गरियाते हुए शान-ए-भोपाल में लदे थे।
Published on:
10 Feb 2019 02:18 pm
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