
भोपाल@रूपेश मिश्रा
मध्य प्रदेश में राजकीय प्रतीकों की समृद्ध श्रृंखला है, लेकिन सरकारी साज-संभाल, जागरूकता और प्रचार-प्रसार के कागजी प्रयासों के चलते संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश की पहचान, गौरव और इतिहास को अमिट बनाए रखने के लिए 13 राजकीय प्रतीकों को अपनाया और घोषित किया गया था। जैसे टाइगर ऑफ वॉटर के नाम से मशहूर महाशीर प्रजाति की मछली को राजकीय मछली का दर्जा दिया। राजकीय खेल में मलखम्ब और सुख का दाता, सब का साथी... जैसा राजकीय गीत तक अपनाया गया। सरकार ने इन्हें राजकीय प्रतीकों का दर्जा तो दे दिया लेकिन उसके बाद कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। इसी का नतीजा है कि प्रदेश की राजकीय मछली विलुप्त होने की कगार पर है। राजकीय खेल मलखम्ब को भी वो पहचान अभी तक नहीं मिल पाई, जिसका वह हकदार है। मलखम्ब एकेडमी दो बार घोषणा से आगे नहीं बढ़ सकी तो हाल ही में प्रदेशभर में जो 14 प्रशिक्षण केंद्र खोले थे, उनका संचालन भी भगवान भरोसे है। प्रदेश का राजकीय गान भी सिर्फ चंद आयोजनों तक सीमित हो गया है। किसी स्कूल या कॉलेज में नियमित प्रदेश का राजकीय गान नहीं होता। खैर, सुकून इस बात का है कि राजकीय पेड़ वटवृक्ष और राजकीय पक्षी दूधराज की स्थिति जरूर बेहतर है। इसमें भी सरकार से ज्यादा इनके खुद के प्राकृतिक ढांचे की मजबूती इसकी वजह है। अगर ये भी सरकारी अफसरों के सिस्टम के भरोसे हो जाएं तो हालत खराब होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। पत्रिका की इस खास रिपोर्ट में पढ़े, कैसे प्रदेश के राजकीय प्रतीक बेकद्री का शिकार हो रहे हैं।
राजकीय मछली- महाशीर
प्रदूषित होती नदियों ने साफ-सुथरी महाशीर पर लाया संकट, सरकार के प्रयास भी सुस्त
प्रदेश की राजकीय मछली महाशीर का अस्तित्व संकट में है। अस्तित्व बचाने के लिए पिछले कई सालों से कार्य कर रही डॉ. श्रीपर्णा सक्सेना ने बताया कि इनकी विलुप्तता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पहले 100 में 26 प्रतिशत मछलियां महाशीर होती थीं लेकिन अब सिर्फ 1 प्रतिशत ही बची हैं। इसके पीछे नदियों का प्रदूषित होना भी प्रमुख कारण है, क्योंकि महाशीर की टोरटोर प्रजाति साफ-सुथरे पानी में ही जिंदा रह पाती है।
जिम्मेदार अब कह रहे-
मत्स्योद्योग विभाग के प्रभारी संचालक भरत सिंह ने बताया कि महाशीर मछली विलुप्त होने की कगार पर है। इसके संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अब प्रदेश का पहला महाशीर मछली का हैचरी सेंटर खोला जा रहा है। इसके लिए 1.49 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर दिया है, जिसके लिए अनुमति का इंतजार है।
राजकीय खेल- मलखम्ब
राज्य स्तरीय एकेडमी कागजों में सिमटी, प्रशिक्षण केंद्र भी हो रहे बंद
प्रदेश का राजकीय खेल मलखम्ब है। यह इस कदर हाशिए पर चला गया है कि न तो खिलाड़ी इसको अपना रहे हैं और न ही सरकार। सरकार ने हाल ही में प्रदेश में मलखम्ब के 13 से 14 प्रशिक्षण केंद्र खोले थे, लेकिन उनमें से भी कुछ सेंटर बंद हो चुके हैं। केंद्र उपेक्षित हैं तो यहां नियुक्त किए गए प्रशिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय नहीं मिल पा रहा। बदहाली का आलम ये है कि सरकार ने वर्ष 2007 और 2012 में राज्य स्तरीय एकेडमी बनाने की घोषणा की लेकिन ये आज तक आकार नहीं ले सकी। एकेडमी केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई।
जिम्मेदार अब कह रहे-
खेल एवं युवक कल्याण विभाग के संचालक रवि गुप्ता का कहना है कि मलखम्ब खेल राजकीय होने के कारण हमारी प्राथमिकता में है। जो तीन सेंटर बंद होने की जानकारी मिली है, उसके बारे में पता करवाता हूं। वहीं एकेडमी खोलने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
राजकीय गीत- सुख का दाता, सब का साथी, शुभ का यह संदेश है...
सरकारी कार्यक्रमों से आगे स्कूल-कॉलेजों तक नहीं पहुंचा गीत
मध्यप्रदेश के राजकीय गान 'सुख का दाता, सब का साथी, शुभ का यह संदेश है' इस गीत में प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का बखान है। सरकार ने साल 2011 में अध्यादेश लाकर कहा था कि ये गीत सभी स्कूलों और कॉलेजों में अनिवार्य रूप से गाया जाएगा। हकीकत ये है कि कुछ ही सरकारी स्कूलों में इसकी पालना हो पा रही है। ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का राजकीय गीत भी है, इसकी जानकारी भी बमुश्किल होगी। इसको लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव का कहना है कि ये गान मध्यप्रदेश के गौरव को बताता है। सरकार ने इसे हर जगह अनिवार्य किया है। ये स्कूल और कॉलेजों में नहीं गाया जाता, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। इसे हर जगह गाया जाना चाहिए तभी तो बच्चे प्रदेश के गौरव को जान सकेंगे। मध्यप्रदेश बाल आयोग के पूर्व अध्यक्ष बृजेश सिंह चौहान का कहना है कि प्रदेश का गीत हर स्कूल में गाया जाए। इसको लेकर आदेश भी निकाले हैं लेकिन ज्यादातर कड़ाई से पालना नहीं करते।
जिम्मेदार अब कह रहे-
डीपीआई आयुक्त अभय वर्मा का कहना है कि राज्य गान को लेकर क्या सर्कुलर निकले हैं, इसको देखना पड़ेगा। अगर किसी स्कूल में मध्यप्रदेश गान नहीं हो रहा है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। जहां तक सवाल निगरानी रखने का है कि तो इतने स्कूल हैं कि प्रदेशभर में इनकी निगरानी रख पाना संभव नहीं है।
इनके प्रतीकों को प्रकृति ने खुद बना रखा है मजबूत
राजकीय पेड़- वटवृक्ष
जंगल का ईको सिस्टम टिका जिस पेड़ पर, उसका सर्वे नहीं
प्रदेश के राजकीय पेड़ वटवृक्ष के हालात अभी तक अच्छे हैं, क्योंकि इन्हें प्रकृति का भरपूर साथ मिल रहा है। पर्यावरणविद् डॉ. सुरेश वाघमारे ने बताया कि वटवृक्ष स्टोर प्रजाति के होते हैं। इस पर पूरे जंगल का ईको सिस्टम टिका रहता है। जहां तक सवाल इनकी संख्या बढऩे और घटने का है तो ऐसा कोई सर्वे नहीं कराया जाता है। लेकिन प्राकृतिक रूप से राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में इन पेड़ों की संख्या काफी अच्छी तादाद में है। इन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा रही है।
राजकीय पक्षी- दूधराज
भोज वेट लैंड में 45 दूधराज देखे गए
प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज की प्रजाति अभी संकटग्रस्त की श्रेणी में नहीं आ पाई है। अभी ठीक-ठाक तादाद में ये पाए जा रहे हैं। पक्षी विशेषज्ञ मोहम्मद खालिक ने बताया कि दूधराज स्थानीय प्रवासी पक्षी हैं। ये दक्षिण के घने इलाकों से आते हैं। अब प्रदेश के कान्हा, पेंच, पन्ना और सतपुड़ा जैसे घने जंगलों में इनकी प्रजाति स्थानीय भी हो गई है। दूधराज प्रजाति के लिए मई से लेकर जुलाई-अगस्त तक का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि ये तभी बच्चे देते हैं। खालिक ने बताया कि विंटर वर्ड काउंट अप्रैल से जून 2022 तक हुआ, जिसमें भोज वेट लैंड में 45 दूधराज देखे गए।
जिम्मेदार यह कह रहे-
प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) जसबीर सिंह चौहान के अनुसार राजकीय पक्षी दूधराज की संख्या अभी अच्छी है, इसलिए गिनती नहीं करवाई जा रही है। राजकीय पक्षी होने के नाते लोगों के बीच इसको लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया जा रहा है।
ये 13 प्रतीक हैं राज्य की विरासत
मप्र का राजकीय चिह्न---गोल आकृति में बरगद, गेहूं और धान आदि उत्कीर्ण हो
मप्र का राजकीय गान---मेरा मध्यप्रदेश
मप्र का राजकीय खेल----मलखम्ब
मप्र का राजकीय पशु---बारहसिंघा
मप्र का राजकीय पक्षी---दूधराज
मप्र का राजकीय पुष्प---सफेद लिली
मप्र का राजकीय फल---आम
मप्र का राजकीय वृक्ष---वटवृक्ष या बरगद
मप्र की राजकीय फसल---सोयाबीन
मप्र का राजकीय नृत्य---राई
मप्र की राजकीय नाटक---माच
मप्र की राजकीय मछली---महाशीर
मप्र की राजकीय नदी---नर्मदा
Published on:
19 Oct 2022 07:29 pm
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