हम आज के भारत में रह रहे हैं, यह वो भारत है, जो पुरानी रूढ़ीवादी परंपरा से बाहर आ चुका है। नई सोच है, नए इरादे हैं। इंसान को इंसान की नजर से देखें, न कि उसकी प्राकृतिक कमी के कारण उसे दोष दें। हमें आज ही अपना नजरिया बदलना होगा। ताकि आने वाला समय ऐसे लोगों के लिए सुखदायी हो।