
जोधपुर. शहर की नई सडक़ रोड़ पर ऑटोरिक्शा चालकों ने सडक़ पर ही अपने ऑटोरिक्शा लगा रखे हैं। जिससे यातायात बाधित होता नजर आया। इसी तरह घंटाघर के अंदर भी ऑटोरिक्शा खड़े नजर आए।
jitendra.chourasiya@भोपाल। प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी कहलाने वाला इंदौर शहर फिर सिरमौर बना है। अब इंदौर को वॉटर-प्लस अवार्ड मिला है। देश में सिर्फ तीन शहरों को यह दर्जा मिला है। इसमें इंदौर के अलावा सूरत और दिल्ली शामिल हैं। यह दर्जा सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट में सबसे बेहतर प्रबंधन के लिए मिला है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इस पर ट्वीट करके बधाई दी है। साथ ही लिखा है कि इससे इंदौर शहर देश में स्वच्छता और काम की मिसाल बनेगा।
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नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि स्वच्छ भारत सर्वेक्षण में इंदौर को वॉटर प्लस का पुरस्कार मिला है। इस स्वच्छ भारत सर्वेक्षण की इस श्रेणी के पुरस्कार के लिए देश के कुल 84 शहरों ने आवेदन किया था। केंद्र सरकार के दल ने इनमें से 33 शहरों की व्यवस्थाओं का मौके पर ही गहन निरीक्षण करने के बाद इंदौर सहित गुजरात और दिल्ली को बुधवार को विजेता घोषित किया है।
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इसलिए मिला अवार्ड-
इस अवार्ड के साथ इंदौर अब सीवेज वाटर के बेहतर प्रबंधन वाले शहरों में शामिल हो गया है। मंत्री सिंह के मुताबिक यह उपलब्धि जिन बिंदुओं के आधार पर मिली है, उनमें सीवेज के पानी और मल अपशिष्ट का सुरक्षित निष्पादन तथा ट्रीटेड (उपचारित) पानी की री-सायक्लिंग कर उसे फिर उपयोग के लायक बनाना प्रमुख हैं। केंद्रीय दल ने इंदौर को नाले, गटर की मशीनों से प्रभावी तथा सुरक्षित सफाई और मल निकासी एवं नालियों की सफाई हेतु वाहनों की समुचित मात्रा एवं व्यवस्था में भी सफल पाया। इसके साथ ही पर्यावरण समाधान वाले एसटीपी से पर्याप्त सफल कार्य के चलते भी इंदौर को यह पुरस्कार दिया गया है। दल ने इंदौर को नाला सफाई तथा एसटीपी के संचालन तथा रखरखाव में शत-प्रतिशत सफल पाया। उसने यह भी पाया कि इंदौर सीवेज की सफाई, पानी के जमाव को हटाने, पानी का रिसाव रोकने तथा संबंधित शिकायतों के प्रभावी और तुरंत निराकरण में सफलता प्राप्त करने वाले प्रमुख शहरों में अग्रणी है।
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Published on:
11 Aug 2021 09:00 pm
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