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Instagram Reels: ज्यादा रील देखने वालों को हो रहा गुस्सा और चिड़चिड़ापन, हो रहे डिप्रेशन का शिकार, ऐसे पाएं छुटकारा

Instagram Reels: हाल ही में मनोवैज्ञानिकों ने रील्स बनाने के शौक पर अध्ययन किया है। डायरेक्ट साइंस मैगजीन ने इससे संबंधित आलेख प्रकाशित किया है। इससे भारत में रील्स बनाने को लेकर युवाओं पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक असर का अध्ययन किया गया है। वही हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू ने स्क्रॉलिंग एडिक्शन पर अध्ययन जारी किया है। दोनों में रील्स के बहुत अधिक देखने या बनाने से नकारात्मक मानसिकता विकसित का जिक्र किया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि भारत में सबसे अधिक लोग इंस्टाग्राम देखने वाले हैं।

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Instagram Reels

क्या होती हैं रील्स

रील्स एक तरह का इंस्ट्राग्राम पर शॉर्ट वीडियो होता है। शुरू-शुरू में यह रील्स 30 सेकेंड का हुआ करती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 90 सेकेंड तक कर दिया गया है। रील्स का चलन तब से शुरू हुआ, जब भारत में टिकटॉक बंद हुआ। इसके बंद होते ही इंस्टाग्राम पर लोग रील्स डालने लगे। रील्स में कई तरह के वीडियो होते हैं, जैसे इंफॉमेर्शन, फनी, मोटिवेशनस, डांस आदि।

वक्त का पता ही नहीं चलता

रील्स को लेकर किया गया अध्ययन बताता है कि रील्स देखने के चलते लोग समय का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसके फेर में घंटों वक्त निकल जाता है और लोगों को पता ही नहीं चलता। इसका असर उनके काम पर पड़ रहा है। लोगों में डिप्रेशन यानी अवसाद की समस्या देखने को मिल रही है। लोग कई बार रील्स देखकर खुद में खामी तलाशने लगते हैं। खुद की सामनेवाले से तुलना करने लगते हैं। सामने वाले जैसा बनने की कोशिश करने लगते हैं। इसके अलावा लोग खुद भी रील्स बनाना चाहते हैं। जब उनके रील्स वायरल नहीं होते, व्यूज नहीं मिलते हैं तो उन्हें गुस्सा और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। यह धीरे-धीरे डिप्रेशन में बदल जाता है।

छोटे बच्चों पर रील्स का असर

आजकल बच्चे भी रील्स देख रहे हैं और खुद बना भी रहे हैं। बीते दिनों ऐसे वीडियो भी देखने में आए जिसमें बच्चे रील्स में डांस, मेकअप कर रहे हैं, दिनचर्या बता रहे हैं और पैरेंट्स उन्हें मारते हैं। यह बच्चों के दिमाग पर गलत प्रभाव डाल रहा है। बच्चों में सीखने की क्षमता कम होने और बोलना देर से शुरू करने जैसी समस्या हो रही है। उन्हें कम उम्र में ही चश्मे भी लग रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई का भी नुकसान होता है। फिजिकल एक्टिविटी कम होने से मोटापे का शिकार हो जाते हैं।

रील्स पर लाइक्स नहीं आने से डिप्रेशन में जा रहे लोग

यह एक प्रकार का नशा है, जो मानसिक रूप से हमें बीमार कर रहा है। लोग एक-दूसरे की देखा-देखी रील्स बनाते हैं और जब उस पर लाइक्स नहीं आते तो डिप्रेशन में चले जाते हैं, अगर कपल्स की रील देख्रते हैं तो हम अपने जीवनसाथी के साथ उस कपल की तुलना करते हैं कि हम उनके जैसे क्यों नहीं? ऐसी तुलना हर चीज में होती है, जैसे रहन-सहन, लुक्स, नॉलेज, दोस्तों का ग्रुप। ये चीजें हमारे अंदर हीनभावना भी पैदा करती हैं। डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक

ऐसे पाएं छुटकारा

● सोशल मीडिया पर रहने का समय तय करें। तय करें कि सोने के पहले रील्स नहीं देखेंगे।

● रील्स देखने में जो समय बीता रहे हैं, वो दोस्तों के साथ गुजारें।

● रील्स देखने की बजाय कोई दूसरी हॉबी तलाशें, जैसे - गाने सुनना, किताब पढ़ना।

● फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं, आउटडोर एक्टिविटीज में भाग लें, साइकल चलाएं, वॉक करें।

आंखों में बनी रहती है ड्राइनेस, होती है जलन

डॉ निशा मिश्रा, आई स्पेशलिस्ट का कहना है कि लगातार फोन देखने से आंखों पर जोर पड़ता है। इससे माइनस नंबर का चश्मा लग सकता है। यदि आप ब्राइटनेस बढ़ाकर फोन देखते हैं तो आंखों में ड्राइनेस की समस्या आती है, आंखें लाल हो जाती हैं। वहीं अगर आप ब्राइटनेस कम करके देखें तो आंख के पर्दे खराब हो सकते हैं। इसके अलावा देर रात तक रील्स देखने से नींद पूरी नहीं होती और अगले दिन आंखों में जलन होती है।