
भोपाल। गुरुवार 1 फरवरी 2018 को मोदी सरकार का बजट पेश हो रहा है। मोदी सरकार के वित्त मंत्री यह बजट पेश कर रहे हैं, लेकिन क्या देश की जनता जानती है कि बजट का मतलब लैदर का बैग होता है। इसके बाद हलवा सेरेमनी में खुशियों का हलवा बांटा जाता है।
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क्या आप जानते हैं कि बजट लेदर के बैग से बना है। यानि बजट शब्द फ्रेंच भाषा के bowgette से निकला है, जिसका शाब्दिक अर्थ लेदर बैग होता है। बजट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, देश के लिए विकास योजनाएं तैयार करने और भविष्य में आने वाले सरकारी खर्चों के अनुमान पर आधारित होता है। बजट के तहत आने वाले खर्चों को ध्यान में रखते हुए टैक्स में कटौती या बढ़ोत्तरी की संभावनाओं की जानकारी होती है। भारत के बजट से जुड़े हुए कई अनकहे किस्से हैं, जिन्हें आज हम आपके लिए लेकर आए हैं!
हलवा सेरेमनी है जरूरी
किसी भी शुभ काम की शुरुआत मीठे से की जाती है। इसी परंपरा को वित्त मंत्री आगे बढ़ाते हैं। जब बजट बनाने और प्रिंटिंग तक का काम पूरा हो जाता है तो वित्त मंत्री अपने हाथों से मुंह मीठा करवाकर इस शुभ काम की शुरुआत करते हैं। इसी के बाद वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करते हैं।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने शुरू की प्रक्रिया
भारत जब अंग्रेजों का गुलाम था तब पहली बार बजट पेश करने की परंपरा ईस्ट इंडिया कंपनी ने शुरू की। कंपनी का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने 7 अप्रैल 1860 को पेश किया था। शुरूआत में राष्ट्रपति भवन में बजट के पेपर्स छापे गए, इसके बाद प्रिंटिंग स्थल को नई दिल्ली, मिंटो रोड स्थानांतरित कर दिया गया था। उस दौरान बजट पेश करने से एक हफ्ता पहले वित्त मंत्रालय के पब्लिशर्स को प्रेस एवं अन्य गतिविधियों से अलग रखा जाता है।
ऐसा था आजाद भारत का पहला बजट
आजाद भारत का पहला बजट वित्त मंत्री शानमुखम चेट्टी ने नवंबर 1947 में पेश किया। उस दौरान किसी तरह के टैक्स के प्रस्तावों को शामिल नहीं किया गया था। नई गठित संसद के समक्ष पहला बजट सीडी देशमुख ने पेश किया था। पहले बजट पेपर्स अंग्रेजी में ही छपते थे। 1955 के बाद से बजट पेपर्स हिंदी में भी छपने शुरू हो गए।
ऐसा था हमारा ब्लैक बजट
बजट को वर्ष 1973-74 के दौरान ब्लैक बजट के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसमें 550 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया गया था। जिसके बाद 1979 में तत्कालीन वित्त मंत्री मुरारी जी देसाई को इस्तीफा देना पड़ा था। हमारे देश की पहली महिला वित्त मंत्री इंदिरा गांधी रहीं। 1987 में राजीव गांधी ने बजट पेश किया था। उन्होंने बजट में कॉपोर्रेट टैक्स को जोड़ा।
पहली बार जुड़ा था सर्विस टैक्स
1991 में कांग्रेस की सरकार में मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया गया। 1991 में उन्होंने सर्विस टैक्स और विदेशी निवेश प्रस्ताव का कॉन्सेपट पेश किया। आई.के.गुजराल के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान संवैधानिक संकट उत्पन्न हो जाने के बाद 1996 में पी.चिदंबरम ने बगैर बहस के बजट पेश किया। एक साल बाद फिर उन्होंने ड्रीम बजट का प्रस्ताव रखा।
दिन में 11 बजे होती है बजट की घोषणा
साल 2000 तक केंद्रीय बजट की घोषणा 5 बजे शाम को की जाती थी, लेकिन यशवंत सिन्हा ने 2001 में 11 बजे दिन में बजट की घोषणा कर नई परंपरा शुरू की।
सबसे ज्यादा बजट इन्होंने पेश किया
सबसे अधिक 10 बार बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री मोरारीजी देसाई थे। उनके बाद प्रणब मुखर्जी, पी.चिदंबरम, यशवंत सिन्हा, वाई.बी.चौहान और सीडी देशमुख हैं, इन सभी ने सात-सात बार बजट पेश किया। मनमोहन सिंह और टीटी कृष्णमचारी ने 6-6 बार बजट पेश किया। आर.वेंकटरमन और एच.एम.पटेल ने तीन-तीन बजट पेश किए। सबसे कम बार जसवंत सिंह, वी.पी.सिंह, सी.सुब्रमण्यम, जॉन मथाई और आर.के.शानमुखम ने दो-दो बार बजट पेश किया।
Published on:
01 Feb 2018 10:02 am
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