
क्या आप जानते हैं मोना लिसा के मुस्काराने का राज..? यहां देखें
भोपाल। फ्रांस के संग्रहालय में मोना लिसा की मुस्कान का राज : यहां फ्रांस के पेरिस स्थित लूव्र संग्रहालय की फोटोज भी एग्जीबिट की गई हैं। ये संग्रहालय ऐतिहासिक स्मारक भी है। यहां प्रागैतिहासिक काल से लेकर 19वीं शताब्दी तक की 35000 से ज्यादा अवशेषों को स्थान दिया गया है। साठ हजार छह सौ वर्ग मीटर में फैला ये संग्रहालय राजा लूव्र का महल है। जिसा सुरक्षा प्राचीर 12वीं शताब्दी में राजा फिलिप द्वितीय के समय बनना प्रारंभ हुई थी। फ्रांस की क्रांति के समय इसे संग्रहालय में तब्दील करने का निर्णय लिया गया था। यहां विश्व प्रसिद्ध मोना लिसा की पेंटिंग और फिलिप पॉट का स्मारक भी रखा गया है।
एमपी में हैं 488 राज्य संरक्षित स्मारक, 58 संग्रहालय
माधवराव सप्रे संग्रहालय में ‘समाज में संग्रहालयों की भूमिका और महत्व’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में पुरातत्व एवं संग्रहालय आयुक्त, अनुपम राजन ने कहा कि मप्र के सभी संग्रहालय डिजिटल प्लेटफार्म पर एक साथ आएंगे। इससे ज्ञान के प्रसार की गति तेज होगी साथ ही सरकारी-गैर सरकारी सभी संग्रहालयों की डायरेक्टरी भी बनाई जाएगी। राजन ने कहा कि संग्रहालय कला और संस्कृति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भारत की विरासत अत्यंत समृद्ध है, डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध होने पर दूर बैठे हुए भी देखने-जानने-समझने की सुविधा संभव हो सकेगी।
राजन ने बताया कि मप्र में 488 राज्य संरक्षित स्मारक हैं। पुरातत्व के 58 संग्रहालय हैं। इनके संरक्षण के लिए बजट की कमी तो महसूस होती है लेकिन प्राथमिकता बनाकर काम करने की कोशिश जारी है। उन्होंने समकालीन वस्तुओं को भी सहेजकर रखने की जरूरत बताई जो कि कुछ काल बाद इतिहास बन जाने वाली हैं। इस दौरान राजकुमार गुप्ता ने मध्यप्रांत के क्रिमिनल इंटेलीजेंस गजट की वर्ष 1926 से 1937 तक की प्रतियों की जिल्द सप्रे संग्रहालय को भेंट की।
114 भाषाओं की ‘टिनटिन’ का कलेक्शन
रीजनल साइंस सेंटर में प्रदेश भर 45 कलेक्टर्स ने अपनी सालों की मेहनत लोगों के सामने पेश की। 12वीं के छात्र अरुण सिंह ने 114 भाषाओं में प्रकाशित टिनटिन कॉमिक्स का कलेक्शन एग्जीबिट किया। दानिश नगर में रहने वाले अरुण सिंह को कॉमिक्स कलेक्ट करने का शौक है। वो पिछले चार सालों से टिनटिन कॉमिक्स कलेक्ट कर रहे हैं। अरुण का कहना है कि बाइबिल के बाद सबसे ज्यादा भाषाओं में टिनटिन का ही अनुवाद किया गया है।
इसके कई एडिशन भी है जिसकी मात्र पांच सौ से एक हजार प्रतियां ही प्रकाशित हुई। इसके कलेक्शन के लिए विदेशी कलेक्टर की मदद ली। बदले में उसे अपने कलेक्शन से एक बुक दे दी। उनके पास भारतीय भाषा में अनुदित 15 बुक्स का भी कलेक्शन है। जबलपुर निवासी अनिता पिछले दो सालों से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ थीम पर काम कर रही है। अनिता का कहना है कि वह पेपर में प्रकाशित होने वाली आर्टिकल, डिपार्टमेंट की न्यूज कटिंग, पोस्टल और बैनर कलेक्शन करती है। उसके संग्रह में इस थीम से संबंधित 80 चीजें शामिल हो चुकी है।
Published on:
19 May 2018 06:49 pm

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