
MP में लोकसभा चुनाव ने बदले समीकरण, अब इस नई स्थिति से तनाव में भाजपा!
भोपाल। मध्यप्रदेश की सरकार को खतरे से जुड़ी तमाम बातें इन दिनों सामने आ रही हैं। माना जा रहा है इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए कांग्रेस की ओर से कुछ प्लान भी तैयार किए गए हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोकसभा में भाजपा को मिली भारी जीत प्रदेश में कांग्रेस के लिए फायदेमंद सिद्ध हो रही है। यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं कि कैसे लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार कांग्रेस की राज्य सरकार को बचाने में सहयोगी सिद्ध हो रही है...
दरअसल अब तक राज्य सरकार को लेकर सामने आ रहे आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश के 230 विधायकों में से 114 कांग्रेस के जबकि 109 भाजपा के हैं, ऐसे में सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 116 है।
जिससे कांग्रेस के साथ ही भाजपा भी बहुत पास है, जहां कांग्रेस ने एक निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाकर अपनी सरकार बना ली इसके साथ ही और निर्दलीय व बसपा और सपा विधायक भी उनके साथ आ गए।
वहीं सरकार गिरने की बातों के बीच अचानक भाजपा के विधायकों की संख्या में कमी हो गई है। जिसका सीधा लाभ कांग्रेस की प्रदेश सरकार को मिला है, क्योंकि प्रदेश सरकार बदलने के जादुई आंकड़े से भाजपा की दूरी कम होने के बजाय एकाएक बड़ गई है।
ऐसे समझें पूरा मामला...
दरअसल, मध्य प्रदेश के झाबुआ से बीजेपी विधायक लोकसभा चुनाव में विजयी होकर सांसद बन गए। बीजेपी विधायक की जीत के साथ ही अब यहां विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति थोड़ी और मजबूत हुई है। वहीं भाजपा 109 से 108 विधायकों पर रह गई है! कारण एक विधायक सांसद हो गए हैं।
दरअसल, झाबुआ से बीजेपी विधायक जीएस दामोर को पार्टी ने रतलाम-झाबुआ लोकसभा का टिकट दिया और वह चुनाव जीते भी। अगर दामोर विधायक पद से इस्तीफा देते हैं तो विधानसभा में भाजपा की संख्या 108 रह जाएगी।
झाबुआ में दामोर ने कांग्रेस के डॉ. विक्रांत भूरिया से विधानसभा का चुनाव 10437 मतों से जीता था।
उपचुनाव होने तक राहत, समर्थन की जरुरत नहीं
इस सीट पर उपचुनाव होने तक कांग्रेस के लिए राहत बनी रहेगी। ऐसे हालात में कांग्रेस सरकार को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह 115 विधायकों के साथ बहुमत में होगी और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सुरक्षित बची रहेगी। ऐसे में भाजपा नेताओं के उस दावे को झटका लगने वाला है, जिनमें कांग्रेस सरकार के अल्पमत में होने का आरोप लगाया जा रहा था।
वहीं यह स्थिति कम से कम अगले छह महीने तक बनी रहनी है, जबकि झाबुआ सीट पर उपचुनाव होना है। ऐसे में कांग्रेस के पास 115 विधायकों के संख्याबल के साथ विधानसभा में पर्याप्त सीटें होंगी और उसे फिलहाल बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कांग्रेस को 121 विधायकों का समर्थन
उधर, सीएम कमलनाथ के मीडिया कोऑर्डिनेटर नरेंद्र सालूजा कहते हैं, बिल्कुल जैसे ही दामोर इस्तीफा देंगे हम खुद ही पूर्ण बहुमत में होंगे। पर, यह देखना दिलचस्प होगा कि अब दामोर विधानसभा से इस्तीफा देते हैं या फिर लोकसभा से।
बता दें कि फिलहाल कांग्रेस को 121 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इनमें से तीन निर्दलीय, दो बीएसपी और एक एसपी के विधायक शामिल हैं।
झाबुआ उपचुनाव तय कर सकता है पूर्ण बहुमत की राह!
माना जा रहा है कि डामोर के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद झाबुआ विधानसभा का उपचुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो यदि इस उपचुनाव में कांग्रेस जीत गई तो वह 116 विधायकों के साथ स्पष्ट बहुमत में आ जाएगी।
जानकार मानते हैं कि 229 संख्याबल होने पर कांग्रेस के पास 115 विधायकों के साथ अब पूर्ण बहुमत है। उधर, विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव जिन्होंने कई मौकों पर कहा कि सूबे में कमलनाथ सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, कहते हैं, 'हम कोई जल्दबाजी में नहीं हैं।' वहीं इन बदले हुए समीकरणों से भाजपा में तनाव जरूर बढ़ सकता है।
वहीं अंदरखानों से आ रही सूचना के अनुसार भाजपा ने अब इस समीकरण पर भी सोचना शुरू कर दिया है। वैसे इससे पहले पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि हम कमलनाथ सरकार को गिराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
हां, अगर उनकी सरकार खुद गिरती है तो फिर हम उस स्थिति का आंकलन करते हुए जो उचित होगा, उस समय फैसला लेंगे। हालांकि यह सच है कि अब दामोर के इस्तीफा देने की स्थिति में फिलहाल कांग्रेस को बाहर से किसी के समर्थन की जरूरत भी नहीं है।'
वहीं जानकारों की मानें तो इस समय भाजपा सही कहती लग रही है कि कांग्रेस खुद डरी हुई हैं। अभी उनके भीतर ही दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के बीच टकराव जारी है और भाजपा का मानना है कि जब यह टकराव खुलकर सामने आएगा तो सरकार खुद ही गिर जाएगी।
Updated on:
29 May 2019 04:26 pm
Published on:
29 May 2019 02:49 pm
