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भारत में भी होने वाली है स्पेस टूरिज्म की शुरुआत : इसरो चेयरमैन

- विज्ञान महोत्सव में पहुंचे इसरो चेयरमैन- बोले, भारत में छह करोड़ में ले सकेंगे अंतरिक्ष यात्रा का आनंद- भविष्य में मीथेन गैस से चलेगा अंतरिक्ष यान

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भोपाल। आने वाले समय में अंतरिक्ष यानों में मीथेन गैस का प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए नए इंजनों का निर्माण हो रहा है। चन्द्रमा और मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले यानों में भी मीथेन का ही उपयोग होगा, क्योंकि यही भविष्य का ईंधन है।

यह जानकारी विज्ञान महोत्सव में शामिल होने भोपाल आए अंतरिक्ष विज्ञान विभाग के सचिव व इसरो के चेयरमैन डॉ. एस सोमनाथ ने दी। उन्होंने कहा, भारत में भी स्पेस टूरिज्म की शुरुआत होने वाली है। अंतरिक्ष में यात्रा का आनंद लेने के लिए छह करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।

गगन यान इसी वर्ष होगा लॉन्च
डॉ. सोमनाथ ने कहा, भारत अब स्वदेशी रॉकेटों के जरिए अपने और और अन्य देशों के उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने में आत्मनिर्भर हो चुका है। गगन यान इसी वर्ष अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। अंतरिक्ष विज्ञान के रणनीतिक उपयोगों पर बोले, भविष्य में युद्ध कम्प्यूटर से नियंत्रित होगा।

बच्चों ने बनाया रिकॉर्ड
इससे पहले सोमवार के दिन आठवें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में 484 बच्चों ने मिलकर एग्रो रोबोट बनाकर गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया था। वहीं पहले यह रिकॉर्ड चीन के हांगकांग के नाम दर्ज था। इसके बाद गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड की लिस्ट में भोपाल का नाम जुड़ गया।

दरअसल सोमवार को साइंस फेस्टिवल में 1600 छात्रों ने एक साथ एग्रो रोबोट्स बनाने के लिए हिस्सा लिया। इनमें से 1484 ने ये रिकॉर्ड बनाया। शेष 116 विद्यार्थियों के रोबोट्स ठीक न बनने के कारण रिजेक्ट कर दिए गए। बच्चों ने यह पूरा रोबोट 50 मिनट में तैयार किया। इसमें से कुछ ने तो 15 मिनट में ही रोबोट्स बनाकर तैयार कर लिया।

आयोजन समिति विज्ञा भारती की मयूरी दत्त ने बताया कि पहले यह रिकॉर्ड हांगकांग के नाम था। जहां पर 270 बच्चों ने इस रिकॉर्ड को बनाया था। जबकि भोपाल में 1600 बच्चे एक साथ इस रिकॉर्ड के लिए बैठे।

इस विश्व रिकॉर्ड के लिए कक्षा 6 से 9 तक के बच्चों का चयन किया गया था, जो भोपाल के अलग-अलग स्कूलों से शामिल होने आए थे। बच्चों ने बताया कि उन्हें रोबोट को बनाने में ज्यादा समय और मेहनत नहीं लगी।

वहीं गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधि ऋषि नाथ कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने भी यहां बच्चों का हौसला बढ़ाया। उनका कहना था कि निश्चित ही बच्चे बहुत अच्छा कर गए। उन्होंने यह अवार्ड विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा को दिया।