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पिच्छिका परिवर्तन समारोह: देशभर से जुटे श्रद्धालु, भक्ति नृत्य करते हुए मंदिर पहुंचीं महिलाएं

अशोका गार्डन स्थित जैन मंदिर में रविवार को आचार्य आर्जव सागर महाराज का संघ सहित पिच्छिका परिवर्तन समारोह धूमधाम से मनाया गया।

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पिच्छिका परिवर्तन समारोह: देशभर से जुटे श्रद्धालु, भक्ति नृत्य करते हुए मंदिर पहुंचीं महिलाएं

पिच्छिका परिवर्तन समारोह: देशभर से जुटे श्रद्धालु, भक्ति नृत्य करते हुए मंदिर पहुंचीं महिलाएं

भोपाल. अशोका गार्डन स्थित जैन मंदिर में रविवार को आचार्य आर्जव सागर महाराज का संघ सहित पिच्छिका परिवर्तन समारोह धूमधाम से मनाया गया। इसमें देशभर के विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान संघ को बहनों, ब्रह्मचारी भैयाओं और अनेक भक्तों ने पिच्छिका प्रदान की। इस दौरान चातुर्मास में कलश स्थापना करने वाले श्रद्धालुओं को कलश वितरित किए गए। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ यह समारोह मनाया गया। कार्यक्रम के पहले महिला मंडल द्वारा पवित्र पिच्छिकाओं को मंदिर तक दिव्य घोष के साथ भक्ति नृत्य करते हुए लाया गया। इसके बाद विद्यासागर पाठशाला के बच्चों द्वारा संगीतमय स्वरलहरियों के साथ मंगलाचरण किया गया।

हिंसक, व्यसनी, क्रोधी व्यक्ति के पास बैठने से हमारे मन में भी प्राय: क्रूरता के भाव आएंगे
आचार्य आर्जव सागर महाराज ने कहा कि परमात्मा के आभामंडल में शांति मिलती है। व्यक्ति का आभामंडल होता है। जिस प्रकार गरम वस्तु की गर्मी और ठंडी वस्तु की ठंडक उसके चारों ओर रहती है। उसी प्रकार धार्मिक, दयालु व्यक्ति के पास आभा मंडल का उतना ही प्रभाव होता है, अर्थात ऐसे व्यक्ति के पास रहने से हमें उतनी ही उत्तम शांति मिलती है। आभा मंडल एक शक्ति है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार तीर्थंकर भगवान के समवशरण में बाहर सभाओं में देवी-देवता मनुष्य सब एक साथ बैठकर भगवान के गुणों का चिंतन करते हुए प्रभु की वाणी सुनते हैं। इसके विपरीत हिंसक, व्यसनी, क्रोधी व्यक्ति के पास बैठने से हमारे मन में भी प्राय: क्रूरता के भाव आएंगे। इसलिए अपने आभा मंडल को अच्छा बनाने के लिए अच्छे परिणामों की सिद्धि करें, और बुरी भावनाओं का विसर्जन करें।

इन्हें मिला पुरानी पिच्छिका मिलने का सौभाग्य
मंदिर समिति के अंकित जैन ने बताया कि आचार्य आर्जव सागर महाराज की पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का सौभाग्य डॉ.जयदीप दिवाकर, मुनि भाग्य सागर महाराज की पिच्छिता प्राप्त करने का सौभाग्य अमिता जैन, मुनि महत्त सागर महाराज की पिच्छिका दीपक शिल्पा जैन कानपुर, आर्यिका प्रतिभा माता की पिच्छिका राजकुमार सूर्या परिवार, आर्यिका सुयोगमति माताजी की पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का सौभाग्य सुनील को प्राप्त हुआ।