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पाटनगढ़ में बनेगा जनगढ़ सिंह श्याम संग्रहालय, 8 दीर्घाओं में होगी गोंड और बैगा जनजातियों के परिवेश की झलक

10 करोड़ की लागत से बनने वाला संग्रहालय करीब डेढ़ साल में होगा तैयार, किसी कलाकार की स्मृतियों पर आधारित यह प्रदेश का पहला संग्रहालय होगा

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भोपाल। डिंडोरी जिले के पाटनगढ़ में जनगढ़ सिंह श्याम संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा। अगस्त के पहले सप्ताह में संग्रहालय का काम शुरू हो जाएगा। दो एकड़ में में बनने वाले संग्रहालय की लागत करीब 10 करोड़ रुपए होगी। इसे तैयार होने में करीब डेढ़ साल का समय लगेगा। इसमें गोंड और बैगा जनजातियों के जीवन की झलक भी दिखाई देगी। किसी कलाकार की स्मृतियों पर आधारित यह प्रदेश का पहला संग्रहालय होगा। आज इन्हीं की विरासत को प्रदेश के करीब 250 कलाकार आगे बढ़ा रहे हैं। विश्वभर में हर साल करीब 80 से 100 करोड़ रुपए के गोंड चित्रों की खरीद-बिक्री होती है।

यह संग्रहालय गुरु-शिष्य परंपरा पर होगा

जनजातीय संग्रहालय के क्यूरेटर अशोक मिश्रा ने बताया कि इसका निर्माण गोंड और बैगा समुदाय के कलाकार ही करेंगे। संग्रहालय की इमारत में उनके निवास और परिवेश की झलक दिखाई देगी। इसमें कुल 8 दीर्घाएं होंगी। यह संग्रहालय गुरु-शिष्य परंपरा और उनके रिश्ते को बयां करेगा। इसमें गोंड चित्रकला की यात्रा दिखाई भी देगी।

जनजातीय कलाकार ही करेंगे काम
गोंड और बैगा बहुल इस इलाक में स्थित होने के कारण
संग्रहालय का निर्माण दोनों समुदाय के कलाकार ही करेंगे। एक दीर्घा में बैगा समुदाय के सौंदर्यबोध, वाद्ययंत्र, संगीत, आवास और मुखौटा दिखाई देंगे। वहीं, दूसरी दीर्घा जनगढ़ सिंह श्याम की जीवन और कला यात्रा पर होगी। तीसरी दीर्घा में उनसे गोंड चित्रकला की बारिकियां सीखने वाले पद्मश्री भज्जू श्याम, पद्मश्री दुर्गा बाई, आनंद श्याम, राम सिंह उर्वेती, सुभाष व्याम जैसे कलाकारों की पेंटिंग्स पर होगी। इसमें वे अपनी कला के नजरिए से जनगढ़ सिंह श्याम के जीवन को प्रदर्शित करेंगे। चौथी दीर्घा में वर्तमान में गोंड कला में काम कर रहे कलाकारों की पेटिंग्स लगाई जाएगी। पांचवीं दीर्घा में गोंड परंपरा, शिल्प, जीवन उपयोगी वस्तुएं और मिट्टी, घास और लकड़ी से बने आवास और कपड़े होंगे। अन्य दीर्घा में सोविनियर शॉप, नए कलाकारों के लिए वर्कशॉप जैसे कार्य होंगे।

कौन थे जनगढ़ सिंह श्याम
जनगढ़ सिंह श्याम का जन्म 1962 में और मृत्यू 2001 में हुई थी। उनके बनाए चित्रों ने विश्व में ख्याती पाई। उन्हें गोंड चित्रकला को नए आयाम देने वाला जनक माना जाता है। उनकी 1988 की कृति लैंडस्केप विद स्पाइडर 2010 में सोथबीज, न्यूयॉर्क में 31,250 डॉलर में बिकी - जो किसी आदिवासी कलाकार के लिए पहली बार थी। जिसे आज परधान गोंड कला के नाम से जानते हैं वह भित्तिचित्रों के माध्यम से गोंड आदिवासी घरों में प्रचलन में थी, पर 80 के दशक में जनगढ़ सिंह श्याम ने कागजी चित्रों और भित्तिचित्रों द्वारा अपने इलाके से बाहर लेकर गए और देश-दुनिया में पहुंचाया।