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Janmashtami 2023: भगवान कृष्ण ने आधी रात में क्यों लिया था जन्म, क्या थी वजह ?

Janmashtami 2023: जन्माष्टमी का पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जाएगा। मान्यता है कि कई जन्मों के पापों को नष्ट करता है जन्माष्टमी का व्रत। कृष्ण जन्माष्टमी (janmashtami) का पर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र की मध्य रात्रि में मनाया जाता है।

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Lord Krishna

इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त 6 सितंबर को रात 11:57 बजे से मध्य रात्रि 12:42 बजे तक मनाया जाएगा। इस दिन भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण का मथुरा नगरी के कारागृह में प्राकट्य हुआ था। भगवान श्री कृष्ण की 2 माता थीं और 2 ही पिता थे। श्री कृष्ण माता देवकी और वासुदेव की 8वीं संतान थे। उनके पालन कर्ता नन्द बाबा और यशोदा मैया थे।

आधी रात में क्यों जन्मे श्री कृष्ण

द्वापर युग में श्री कृष्ण ने रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया। इसका कारण उनका चंद्रवंशी होना था। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री कृष्ण चंद्रवंशी थे। उनके पूर्वज चंद्रदेव थे। रोहिणी चंद्रमा की पत्नी व नक्षत्र हैं, इसी कारण रोहिणी नक्षत्र में भगवान ने जन्म लिया। वहीं अष्टमी तिथि शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। कहा जाता है कि चंद्र देव की इच्छा थी कि श्री हरि विष्णु मेरे कुल में कृष्ण रूप में जन्म लें।

भक्त लेते हैं दही-हांडी का मजा

कृष्ण जन्माष्टमी के बाद दही-हांडी उत्सव कई जगह मनाया जाता है। श्रीकृष्ण ने जन्म से ही लीलाएं की थीं, उनमें से एक थी दही हांडी। भगवान कृष्ण को माखन बहुत प्रिय था। वे माखन चुराते थे। तब गोकुल की महिलाओं ने दही-माखन को ऊंचे स्थान पर लटकाना शुरू कर दिया, लेकिन तब भी कृष्णा माखन की मटकी तक पहुंच जाते थे। तभी से दही हांडी मनाने की शुरुआत हुई। कई स्थानों पर नंद उत्सव मनाते हैं।

मुकुट पर सजा मोरपंख

कान्हा के पास मोरपंख होना राधा से उनके अटूट प्रेम की निशानी है। मान्यताओं के अनुसार रास लीला में एक बार कृष्ण और राधा नृत्य कर रहे थे। तभी उनके साथ महल में मोर भी नाचने लगे। एक मोर का पंख नीचे गिर गया। तब श्री कृष्ण ने इसे अपने मुकुट पर सजा लिया।