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समस्याएं अंतरराष्ट्रीय हैं, हल के लिए राष्ट्रों की सीमाओं से परे जाकर कदम उठाने की जरूरत

जय जगत 2020 पदयात्रा में शहर आए गांधीवादी विचारक पी राजगोपालाचारी ने बताई यात्रा की रूपरेखा

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भोपाल

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Sunil Mishra

Nov 29, 2019

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भोपाल. जिन समस्याओं को लेकर हम परेशान है, वह एक देश की समस्या नहीं है। आज यदि अफ्रीका में गरीबी, जलवायु प्रदूषण और हिंसा की समस्या है तो अमेरिका और यूरोप तक में यह समस्या है। हम ग्लोबल वल्र्ड में जी रहे हैं जहां समस्याओं को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता इसलिए कदम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाने की जरूरत है। इसी सोच के साथ एक वर्ष तक चलने वाली अंतरराष्ट्रीय पदयात्रा निकाली जा रही है। यह विचार गांधीवादी विचारक एवं चिंतक पी राजगोपालाचारी ने गुरुवार को गांधीभवन में मीडिया से बात करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर को राजघाट से प्रारंभ हुई पदयात्रा 27 नवम्बर को भोपाल पहुंची है। पदयात्रा दल दो अक्टूबर को सेवा ग्राम वर्धा पहुंचेगी जहां बा-बापू की 150 वीं एवं आचार्य विनोबा भावे की 125 जंयती पर शांति महासभा का आयोजन होगा। इसके बाद यात्रा के दूसरा चरण ईरान से शुरू होकर अरमेनिया, जार्जिया, बुल्गेरिया, बोसनिया, कुरेशिया, इटली जिनेवा। जिनेवा में 27 सितम्बर दो अक्टूबर 2020 तक पूरी दुनिया के पांच हजार होकर, वर्तमान में समय में दुनिया के सामने जो समस्याएं है उन पर गांधीजी की दृष्टि से कैसे सुलझाया जाए इस पर विचार किया जाएगा।

सबसे ज्यादा प्रासंगिक है समय

गांधी जी कहते हैं कि अंतिम व्यक्ति के लिए काम करो वहीं इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी कहा है कोई पीछे नहीं छूटना चाहिए (नो वन विहाइंड लेफ्ट)। ऐसे में गांधी जी की 150 वीं जयंती पर दोनों विचारों के मेल के माध्यम से समस्याओं का हल निकालने की कोशिश बेहद प्रासंगिक है। परिवर्तन और गरीबी की दृष्टि से, जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से गांधीजी इस समय दुनिया के बड़े आईकॉन है।

गांधी जी को समाप्त करना, लाइट हाउस को समाप्त करने के समान

गांधीजी को कमजोर करने का एक प्रयास देश भर में चल रहा है, लेकिन जो लोग शुरू में गांधीजी को कमजोर करने का प्रयास कर रहे थे वह बदल गए। कम्युनिस्ट पार्टी पहले उनकी आलोचना करती थी, आज दोनों हाथों से गांधी को उठा लिया है, दलित आंदोलन के लोगों को भी समझ में आया है कि यह सही नहीं है, मुझे यह विश्वास है जो लोग आज भी इस रास्ते पर चल रहे हैं, कुछ दिनों में उनको अपनी गलती समझ में आएगी। गांधीजी को समाप्त करना लाइट हाउस को समाप्त करने के समान है, इससे केवल नष्ट करने वालों को नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को है। इस तरह के बयान पर कार्रवाई होनी चाहिए , यह कार्रवाई पार्टी को करनी चाहिए।