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कमलनाथ और राकेश सिंह की अग्रि परीक्षा का दौर, छह सीटों पर लगाया जोर

29 अप्रैल को प्रदेश की छह सीटों पर चुनाव, - सीधी,शहडोल,जबलपुर,मंडला,बालाघाट, छिंदवाड़ा में वोटिंग कमलनाथ और राकेश सिंह की अग्रि परीक्षा का दौर, छह सीटों पर लगाया जोर  

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भोपाल

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Arun Tiwari

Apr 26, 2019

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Mahasamund lok Sabha Election 2019

भोपाल : मुख्यमंत्री कमलनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की अग्रि परीक्षा का दौर शुरु हो गया है। प्रदेश के पहले चरण के चुनाव में ही कमलनाथ और राकेश सिंह की लोकसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में कांग्रेस-भाजपा दोनों ने अपना पूरा जोर छह सीटों पर लगा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी २९ अप्रैल को जबलपुर और सीधी में जनसभा करेंगे।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जबलपुर और शहडोल में चुनाव प्रचार कर चुके हैं। २९ अप्रैल को प्रदेश की जिन छह सीटों पर वोटिंग होगी उनमें सीधी,शहडोल,जबलपुर,मंडला,बालाघाट और छिंदवाड़ा शामिल हैं। इस चरण में कमलनाथ और राकेश सिंह के अलावा अजय सिंह, विवेक तन्खा और फग्गन सिंह कुलस्ते जैसे दिग्गज नेताओं के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद हो जाएगा।

छिंदवाड़ा : कमलनाथ की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे नकुलनाथ का चुनावी राजनीति में पहला कदम है। नकुल के कंधों पर पिता की राजनीतिक विरासत और जनता की अपेक्षाओं का भार है। २०१४ में मोदी लहर के बाद भी कमलनाथ ने भाजपा के चौधरी चंद्रभान सिंह को एक लाख से ज्यादा मतों से हराया था। कमलनाथ यहां से नौ बार सांसद रहे हैं। नकुल का मुकाबला भाजपा के आदिवासी नेता नत्थन शाह कवरेती से हैं।

जबलपुर : प्रदेश के पहले चरण के मतदान वाली सीटों में जबलपुर भी शुमार है। जबलपुर से हैट्रिक बना चुके राकेश सिंह के सामने इस बार कई चुनौतियां हैं। इस बार उनका मुकाबला फिर से कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा से है। २०१४ के मुकाबले अब हालात बदल चुके हैं। विधानसभा चुनाव में जबलपुर का राजनीतिक परिदृश्य भी बदला है।

सीधी : कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय सिंह और भाजपा की रीति पाठक के बीच यहां कांटे का मुकाबला है। अजय सिंह को राजनीतिक प्रतिष्ठा बचानी है तो रीति पाठक के सामने सीट बचाने की चुनौती है। यहां बसपा के रामलाल धनिक समेत २६ उम्मीदवार मैदान में हैं। रीति पाठक को अंदरुनी विरोध से भी निपटना है। रीति पाठक ने पिछला चुनाव मोदी लहर में कांग्रेस के इंद्रजीत पटेल को एक लाख से ज्यादा मतों से हराकर जीता था। अब राजनीतिक परिस्थितियां पिछले चुनाव की तरह उनके अनुकूल नहीं हैं।

मंडला : भाजपा के सबसे बड़े आदिवासी चेहरे फग्गन सिंह का राजनीतिक भविष्य इस बार के चुनाव पर टिका है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां फग्गन की जीत मुश्किल कर दी है। कांग्रेस के युवा उम्मीदवार कमल सिंह मरावी उनको कड़ी चुनौती दे रहे हैं।

शहडोल : यहां पर दो महिला नेत्रियों में मुकाबला है। भाजपा की हिमाद्री सिंह और कांग्रेस की प्रमिला सिंह दोनों ने अपनी पार्टी बदलकर उम्मीदवारी ली है। स्थानीय संगठन में दोनों के सामने अंतरविरोध का संकट है। इस बार का चुनाव ये संदेश जरुर देगा कि यहां के आदिवासी चेहरों पर मुहर लगाते हैं या उनके लिए चुनाव चिन्ह मायने रखता है।

बालाघाट : यहां पर मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है। भाजपा से बागी बोधसिंह भगत ने भाजपा उम्मीदवार ढालसिंह बिसेन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस के मधु भगत के सामने भी बसपा से चुनाव लड़ रहे कंकर मुंजारे की चुनौती है। जातिय समीकरण भी यहां बहुत मायने रखता है।