निजी स्कूलों के पक्ष में आई कांग्रेस : पूर्व CM कमलनाथ बोले- कोरोना और लॉकडाउन के कारण बंद हुए 550 स्कूल, सरकार इनकी वित्तीय मदद करे

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने निजी स्कूलों के हालातों पर गौर कराते हुए सरकार से इन्हें वित्तीय मदद प्रदान करने की अपील की है।

By: Faiz

Published: 12 Jul 2021, 08:07 PM IST

भोपाल/ मध्य प्रदेश में ट्यूशन फीस के अलावा भी फीस वसूली करने और स्कूलों में व्यवस्थित क्लासों के संचालन के लिये हड़ताल पर गए प्राइवेट स्कूलों ने सोमवार को अपनी हड़ताल वापस लेते हुए बुधवार 13 जुलाई से छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई व्यवस्थित ढंग से दौबारा शुरु करने का फैसला ले लिया है। लेकिन, एक तरफ जहां मध्य प्रदेश स्कूल एसोसिएशन ने सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है, तो वहीं अब कांग्रेस भी मध्य प्रदेश के निजी स्कूलों के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है। इस संबंध में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने निजी स्कूलों के हालातों पर गौर कराते हुए सरकार से इन्हें वित्तीय मदद प्रदान करने की अपील की है।

 

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कमलनाथ ने ट्वीट कर सरकार से की अपील

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए कहा कि, कोरोना और लॉकडाउन के कारण सिर्फ मध्य प्रदेश में ही 550 निजी स्कूल बंद होने का समाचार सामने आया है। सरकार को इन स्कूलों को वित्तीय मदद देनी चाहिए, ताकि शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का और बच्चों के सामने शिक्षा का संकट खड़ा ना हो। कमलनाथ के इस ट्वीट ने सरकार के लिये एक संदेश ये भी छोड़ा है कि, भविष्य में कांग्रेस भी निजी स्कूलों के साथ ही आगामी कार्रवाइयों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी।

 

स्कूल संचालकों ने कहा- सरकार से लड़ाई जारी रहेगी

इधर, स्कूल एसोसिएशन ने सोमवार को हड़तल खत्म करते हुए कहा कि, बुधवार से सभी स्कूलों के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई तो शुरु कर ही दी जाएगी, लेकिन सरकार के साथ उनके हितों की लड़ाई यथावत जारी रहेगी। एसोसिएशन का कहना है कि, जब तक सरकार ट्यूशन फीस का आदेश वापस नहीं लेगी और 9वीं से 12वीं के स्कूल खोल नहीं देती, तब तक असहयोग जारी रहेगा। तब तक सरकार को किसी तरह का टैक्स स्कूलों द्वारा नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, कोर्ट के आदेश के उलट स्कूल एसोशिएशन ने भी कहा कि, जो भी छात्र समय पर ट्यूशन फीस जमा नहीं करेगा, उससे लेट फीस के नाम पर पैनाल्टी वसूली जाएगी। साथ ही, प्रदेश का कोई भी स्कूल किसी भी सरकारी वॉट‌्सएप ग्रुप से नहीं जुड़ेगा।

 

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सीएम के निर्देश से मुखर हुआ स्कूल एसोसिएशन

आपको बता दें कि, बीती 6 जुलाई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना की तीसरी लहर की आआशंक के चलते स्कूलों को तीसरी लहर का संकट खत्म होने तक बंद रखने के निर्देश जारी किये थे। साथ ही साथ, सीएम ने ये भी कहा था कि, इस अवधि में कोई भी स्कूल अभिभावकों या छात्रों से ट्यूशन फीस के अलावा किसी भी तरह की फीस वसूली नहीं कर सकेगा। सीएम की इस घोषणा के बाद निजी स्कूल संचालक मुखर हो गए थे। इसके चलते उन्होंने 12 जुलाई से ऑनलाइन पढ़ाई, परीक्षा अनिश्चितकालीन तक बंद रखने का निर्णय लिया था।

 

मीटिंग में इन बिंदुओं पर हुआ फैसला

-सभी संगठनों सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
-संकुल के वॉट्सएप ग्रुप में दोबारा नहीं जुड़ेंगे और कार्यों में असहयोग तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार हमारी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक कोई निर्णय नहीं लेती।
-वो सभी पैरेंट्स जो ट्यूशन फीस भी भुगतान नहीं कर रहे, उन्हें लेट फीस के रूप में पैनाल्टी चुकानी होगी।
-अगले निर्णय तक स्कूल संचालक किसी सरकारी टैक्स अथवा बकाए का भुगतान नहीं करेंगे।
-बच्चों एवं पालकों के हित में ऑनलाइन शिक्षण 13 जुलाई से अंडर प्रोटेस्ट फिर शुरु होगी। क्योंकि, वो सरकार से लड़ाई में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं करेंगे।
-जब तक सरकार हमारी मांगों पर विचार करके कोई निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। अगर जरूरत पड़ी तो, सभी स्कूल संचालक, शिक्षक एवं स्टाफ सड़कों पर उतरकर सरकार एक पक्षीय फैसले के अनशन करेंगे।

 

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