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कभी जहाज महल के नाम से जानते थे इसे, अब है इस शहर की पहचान

भोपाल में रानी कमलापति का महल परमार कालीन निर्माण कला की उत्कृष्ट कृति है। इसे समय के अनुसार कई नाम दिए गए।

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Nitesh Tripathi

Feb 12, 2016

भोपाल में रानी कमलापति का महल परमार कालीन निर्माण कला की उत्कृष्ट कृति है। इसे समय के अनुसार कई नाम दिए गए। इसे पहले भोजपाल का महल व जहाज महल भी कहा जाता था। इसका एक कारण यह बताया जाता है कि यह महल राजा भोज के कार्यकाल 1010 से 1055 ईसवी में बने बड़े तालाब के बांध के ऊपर बनाया गया था। महल में जलती मशालों की रोशनी का प्रतिबिंब तालाब में जहाज की तरह नजर आता था। इस महल का निर्माण गिन्नौरगढ़ के राजा निजामशाह के कार्यकाल 1722 ईसवी में उनकी विधवा रानी कमलापति ने बनवाया था।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1989 में इसे धरोहर के रूप में सरंक्षित कर दिया है। महल के बाहर मुगलकालीन तोप व कमरों में किले की जानकारियों को संजोया गया है, जिसे देश-विदेश के पर्यटक देखने आते हैं। जबकि, इस स्थान के पश्चिमी छोर की पहाड़ी पर किला फतेहगढ़ के अवशेष हैं। जिसे परमार काल के बाद भोपाल के प्रथम शासक सरदार दोस्त मोहम्मद खान ने अपने कार्यकाल 1708 से 1726 ईसवी में बनवाया था।

इन्हें आधुनिक भोपाल की स्थापना का श्रेय जाता है। इतिहासकार बताते हैं कि रानी कमलापति ने अपने पति के हत्यारों से बदला लेने के लिए सरदार दोस्त मोहम्मद से संधि की थी। बदले में सरदार दोस्त मोहम्मद को भोपाल मिल गया था और रानी कमलापति गिन्नौरगढ़ किले में चली गई थी। गिन्नौरगढ़ किला देलाबाड़ी जंगल की पहाड़ी पर है।