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कार्तिक पूर्णिमा आज: भगवान की आराधना और स्नान दान देंगे विशेष पुण्य लाभ!

एक साल में पंद्रह पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है, तो 16 पूर्णिमा मनाई जाती हैं।

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Kartik Purnima 2017

भोपाल। इस बार शनिवार यानि 4 नवंबर को आने वाली कार्तिक पूर्णिमा बेहद खास है, सिर्फ हिंदू धर्म ही नहीं, सिखों के लिए भी इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन सिखों के प्रथम देव गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा, महाकार्तिकी या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है।

इस तिथि को बह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्व प्रमाणित किया है। अत: इसमें स्नान, दान, होम, यज्ञ, उपासना आदि करने का अनंत फल मिलता है। एेसे ही भगवान शनि एकमात्र एेसे देव हैं जो भक्तों को पूजा से नहीं बल्कि अच्छे कर्म के आधार पर फल देते हैं। एेसे में शनिवार को पडऩे वाली कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन नदियों और तालाबों में स्नान तथा सायंकाल दीपदान का विशेष महत्व है।

इसी पूर्णिमा के दिन सायंकाल भगवान का मत्स्यावतार हुआ था। इस कारण इस दिन किए गए दान, जप आदि का दस यज्ञों के समान फल मिलता है।

भगवान विष्णु आज जागेंगे :
आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में लीन होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को उठते हैं और पूर्णिमा से कार्यरत हो जाते हैं, इसीलिए दीपावली को लक्ष्मीजी की पूजा बिना विष्णु, श्रीगणेश के साथ होती है। लक्ष्मी की अंशरूपा तुलसी का विवाह विष्णु स्वरूप शालिग्राम से होता है। इसी खुशी में देवता स्वर्गलोक में दिवाली मनाते हैं। इसे देव दिवाली भी कहा जाता है।

वैष्णव भक्तों के लिए भी है खास :
शिव भक्तों की तरह कार्तिक पूर्णिमा वैष्णव संप्रदाय के लिए भी खास है। विष्णु का पहला अवतार मत्स्य यानी इसी दिन हुआ था। यह अवतार वेदों की रक्षा, प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों, अनाजों एवं राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए लेना पड़ा था। इससे सृष्टि का निर्माण कार्य फिर से आसान हुआ।

इसी दिन भगवान शिव बने थे त्रिपुरारी :
पुराणों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार किया था। भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया। इसे 'त्रिपुरी पूर्णिमा' भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा जब उदित हो रहा हो तब शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छह कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की कृपा बनी रहती है।

गुरु पर्व आज, सजेंगे दरबार, होंगे लंगर :
कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। यह 549वां प्रकाशपर्व है। इसी दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। इस दिन सिख अनुयाई सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताए रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं। इसे गुरु नानक देव जयंती के साथ गुरु पर्व भी कहा जाता है।

भोपाल शहर के गुरुद्वारों में सुबह से ही कीर्तन होंगे और अटूट लंगर लगेगा। शुक्रवार से ही गुरुद्वारे आकर्षक रोशनी से दमकते नजर आए। समाज के प्रवक्ता गुरुचरण सिंघ अरोरा ने बताया, प्रकाश पर्व पर सिख पंथ के महान रागी जत्थे भाई साहब भाई हरदीप सिंघ अम्बाला हरियाणा से एवं सिख पंथ के महान विचारक भाई परगट सिंघ मोगा पंजाब द्वारा गुरुमत विचार प्रवचन देंगे। रागी जत्था भाई बहादुर सिंघ एवं गुरुद्वारा के ग्रंथी भाई हरविन्दर सिंघ कथा, कीर्तन, प्रवचन के द्वारा हजारों श्रद्धालुओं को श्री गुरुनानक देवजी की स्तृति कर श्री गुरुग्रंथ साहब के चरणों में जोड़ेंगे।