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Karwa Chauth special: 16 श्रृंगार के बिना अधूरा करवा चौथ का व्रत, 7वां है सबसे जरूरी

करवाचौथ के दिन विवाहित महिलाएं गौरी और गणेश की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।

भोपाल

Published: October 22, 2021 02:16:25 pm

भोपाल। हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक मास (Kartik Month) में कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत (Karwa Chauth Vrat) रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं और व्रत रखती हैं। उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्थी तिथि 24 अक्टूबर 2021 दिन रविवार है। इसलिए करवा चौथ का व्रत 24 अक्टूबर को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि आरंभ- 24 अक्टूबर 2021 रविवार को सुबह 03:01 मिनट से चतुर्थी तिथि का समापन- 25 अक्टूबर 2021 सोमवार को सुबह 05: 43 मिनट पर होगा।

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7वां श्रृंगार है सबसे जरूरी

करवाचौथ के दिन विवाहित महिलाएं गौरी और गणेश की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इस पूजा के लिए महिलाएं खूब सजती सवंरती हैं। मगर क्या आप जानती हैं कि महिलाएं इस दिन 16 श्रृंगार करती हैं। इन साज-सज्जा के समानों कुछ जरूरी चीजें होती हैं जिसे इस्तेमाल करना जरूरी होता है। जानिए 16 श्रृंगार में क्या-क्या आता है और क्या हैं इनका महत्व....

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1. बिंदी: संस्कृत भाषा के बिंदु शब्द से बिंदी की उत्पत्ति हुई है. भवों के बीच रंग या कुमकुम से लगाई जाने वाली बिंदी भगवान शिव के तीसरे नेत्र का प्रतीक मानी जाती है। इसे परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

2. सिंदूर: उत्तर भारत में लगभग सभी प्रांतों में सिंदूर को स्त्रियों का सुहाग चिन्ह माना जाता है और विवाह के अवसर पर पति अपनी पत्नी के मांग में सिंदूर भर कर जीवन भर उसका साथ निभाने का वचन देता है।


3. काजल: काजल आंखों का श्रृंगार है। इससे आंखों की सुन्दरता तो बढ़ती ही है, काजल दुल्हन और उसके परिवार को लोगों की बुरी नजर से भी बचाता है.

4. मेहंदी: मेहंदी के बिना सुहागन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है. शादी के वक्त दुल्हन और शादी में शामिल होने वाली परिवार की सुहागिन स्त्रियां अपने पैरों और हाथों में मेहंदी रचाती हैं. ऐसा माना जाता है कि नववधू के हाथों में मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है, उसका पति उसे उतना ही ज्यादा प्यार करता है.

5. लाल जोड़ा: आमतौर से शादी के वक्त दुल्हन को शादी का लाल जोड़ा पहनाया जाता है. पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में फेरों के वक्त दुल्हन को पीले और लाल रंग की साड़ी पहनाई जाती है. इसी तरह महाराष्ट्र में हरा रंग शुभ माना जाता है और वहां शादी के वक्त दुल्हन हरे रंग की साड़ी मराठी शैली में बांधती हैं. करवा चौथ पर भी सुहागिनों को लाल जोड़ा या शादी का जोड़ा पहनने का रिवाज है.

6. गजरा: दुल्हन के जूड़े में जब तक सुगंधित फूलों का गजरा न लगा हो तब तक उसका श्रृंगार फीका सा लगता है. दक्षिण भारत में तो सुहागिन स्त्रियां प्रतिदिन अपने बालों में हरसिंगार के फूलों का गजरा लगाती है. करवा चौथ पर किए जाने वाले 16 श्रृंगार में से एक गजरा भी है.

7. मांग टीका: सिंदूर के साथ पहना जाने वाला मांग टीका जहां एक ओर सुंदरता बढ़ाता है, वहीं वह सौभाग्य का भी प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि नववधू को मांग टीका सिर के ठीक बीचों-बीच इसलिए पहनाया जाता है कि वह शादी के बाद हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले और वह बिना किसी पक्षपात के सही निर्णय ले सके.

8. नथ: ऐसी मान्यता है कि सुहागिन स्त्री के नथ पहनने से पति के स्वास्थ्य और धन-धान्य में वृद्धि होती है. इसलिए करवा चौथ के अवसर पर नथ पहनना न भूलें.

9. कर्णफूल या कान की बालियां: सोलह श्रृंगार में एक आभूषण कान का भी है. करवा चौथ पर अपना कान सूना ना रखें. उसमें सोने की बालियां जरूर पहनें.

10. हार या मंगलसूत्र: दसवां श्रृंगार है मंगलसूत्र या हार. सुहागिनों के लिए मंगलसूत्र और हार को वचनबद्धता का प्रतीक माना जाता है. सौभाग्य का भी प्रतीक माना जाता है.

11. आलता: नई दुल्हनों के पैरों में आलता देखा होगा आपने. इसका खास महत्व है. 16 श्रृंगार में एक ये श्रृंगार भी जरूरी है करवा चौथ के दिन.

12. चूड़ियां: सुहागिनों के लिए सिंदूर की तरह ही चूड़ियों का भी महत्व है.

13. अंगूठी: अंगूठी को 16 श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा माना गया है.

14. कमरबंद: कमरबंद इस बात का प्रतीक है कि सुहागन अब अपने घर की स्वामिनी है.

15. बिछिया: पैरों के अंगूठे में रिंग की तरह पहने जाने वाले इस आभूषण को अरसी या अंगूठा कहा जाता है और दूसरी उंगलियों में पहने जाने वाले रिंग को बिछिया.

16. पायल: माना जाता है कि सुहागिनों का पैर खाली नहीं होना चाहिए. उन्हें पैरों में पायल जरूर पहनना चाहिए.

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