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केन-बेतवा लिंक परियोजना: बांध की लागत 15 प्रतिशत ज्यादा होगी, 2 साल अतिरिक्त समय लगेगा

पन्ना टाइगर रिजर्व में सिर्फ दिन में ही हो सकेगा काम, जुलाई में जारी होंगे टेंडर

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भोपाल। केन-बेतवा लिंक परियोजना में बनने वाले दौधन बांध के टेंडर जुलाई में जारी होंगे। देश में पहली बार किसी टाइगर रिजर्व के बीच बांध का काम होने से इसकी लागत और समय में भी बढोत्तरी होगी। पन्ना टाइगर रिजर्व में निर्माण कार्य सिर्फ दिन में हो सकेगा। इससे भारी मशीनरी का 24 घंटे की जगह 10 से 12 घंटे ही उपयोग सकेगा। इधर, जल संसाधन विभाग हथाईखेड़ा लैब में इस बांध की टेस्टिंग करेगा। इससे ये पता चलेगा कि बांध स्थल पर निर्माण के दौरान किस तरह की सावधानियां रखी जानी होगी।

6 साल का लगेगा समय

जल संसाधन विभाग(बोधी) के सीई जीपी सोनी के अनुसार 77 मीटर ऊंचे बांध के निर्माण पर करीब पांच हजार करोड़ खर्च होंगे। टाइगर रिजर्व में काम होने के चलते अन्य बांध की अपेक्षा की इसकी लागत में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि होगी। बांध की लागत करीब 5 हजार करोड़ रुपए होगी। बांध को बनने में चार साल का समय लगना चाहिए, लेकिन विभाग कठिनाइयों को देखते हुए 6 साल का समय देगा।

70 मीटर ऊंचा मिट्टी का बांध बनेगा

सोनी के अनुसार देश की अपनी तरह की अनूठी परियोजना में इंजीनियरिंग की अपनी चुनौतियां हैं। दोनों नदियों को जोड़ने के लिए 220.624 किलोमीटर लंबी केन-बेतवा लिंक नहर(बरुआ सागर) बनाई जाएगी। इसमें दो किलोमीटर लंबी सुरंग भी बनाई जाएगी। नहर जहां से होकर गुजरेगी, वहां नेशनल हाईवे और रेलवे लाइन भी है। यहां बि्रज और एक्वा डक्ट का निर्माण करना होगा। परियोजना में 70 मिट्टी ऊंचाई का मिट्टी का बांध भी बनेगा। पहाड़ी इलाका होने के बाद भी ब्लास्टिंग भी सीमित मात्रा में ही की जा सकेगी।

अमेरिका तकनीक से होगी बांधी की स्टडी

बांध निर्माण से पहले हथाईखेड़ा स्थित लैब में इसकी मॉडल स्टडी होगी। इसमें अमेरिकी तकनीक के जरिए बांध की क्षमताओं को परखा जाएगा। यहां छोटा मॉडल डैम तैयार किया जाएगा। इसमें नदी की बहाव क्षमता के अनुरूप पानी को उसी गति से बहाकर गेटों की संख्या का अनुपात, बांध के नीचे जमीन के कटाव और डाउन स्ट्रीम की दीवार की लंबाई और ऊंचाई का सटीक आकलन किया जाएगा। केंद्रीय जल आयोग से इसका ड्राइंग फाइनल होते ही यहां मॉडल डैम तैयार किया जाएगा।