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हमारे पूर्वजों की 30 हजार साल पुरानी ‘कलाकारी’

विश्व जनसंख्या दिवस आज...भीमबेटका; आदिमानवों के शैलाश्रय, शैल चित्र और अन्य पुरावशेष के लिए दुनियाभर में मशहूर

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Know interesting facts about Bhimbetka.

पांच समूहों में बंटे गए क्षेत्र के एक समूह में खास शैलाश्रय हैं। यहां जीर्ण-शीर्ण स्थिति में करीब 20 स्तूप भी हैं।

भोपाल. आज हम आपको रू-ब-रू कराने जा रहे हैं पूर्वजों की 'कलाकारी' से। कहा जाता है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 55 किलोमीटर दूर भीमबेटका आदिमानवों का घर था। यहां मौजूद पेंटिंग (शैल चित्र) करीब करीब 30 हजार साल पुरानी हैं। यहां आदिमानवों के बनाए शैलाश्रय और अन्य पुरावशेष भी मौजूद हैं। इस स्थान को महाभारत के भीम से संबंधित माना जाता है। इसका नाम भीमबैठका (कालांतर में भीमबेटका) पड़ा। ये गुफाएं मध्य भारत के पठार के दक्षिणी किनारे पर स्थित विंध्याचल की पहाडिय़ों के निचले छोर पर हैं। इन्हें देखने के लिए देश-दुनिया से सैलानी और शोधार्थी यहां पहुंचते हैं।

मानव जाति के विकास का प्रमाण
रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज और बरखेड़ा स्टेशन के बीच भियांपुर गांव के पास रातापानी अभयारण्य में स्थित भीमबेटका मानव जाति के विकास और प्रगति का जीवित प्रमाण हैं।

खोज का श्रेय डॉ. वाकणकर को
भीमबेटका की खोज का श्रेय डॉ. विष्णु वाकणकर को दिया जाता है। वर्ष 1957 में उन्होंने नागपुर जाते समय ट्रेन से इन संरचनाओं को देखा था। इसके बाद वे टीम के साथ यहां पहुंचे थे।

स्तूप और दो मंलिा शैलाश्रय भी