
भोपाल. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की आज शादी की सालगिरह है। इस अवसर पर उन्हें सुबह से ही बधाईयां मिल रही हैं। भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ने भी शिवराज सिंह और उनकी पत्नी को बधाई दी। शिवराज-साधना ने अपने वैवाहिक जीवन के 27 साल पूरे कर लिए हैं। एक वक्त था जब शिवराज शादी के लिए ही तैयार नहीं थे। आइए आपको बताते हैं दोनों की दिलचस्प लव स्टोरी।
शिवराज सिंह मध्यप्रदेश के पंद्रह सालों तक मुख्यमंत्री रहे हैं। 5 मार्च 1959 को सिहोर जिले के जैतगांव में उनका जन्म हुआ था। शुरू से ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी थी। यही वजह है कि वे 1972 में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ गए थे। इस दौरान शिवराज ने यह संकल्प ले लिया था कि वे कुंवारे ही रहेंगे। उनकी जिद के आगे घरवालों ने भी हार मान ली थी और शिवराज से छोटे भाई-बहनों की शादी हो गई थी।
जेल में भी बंद रहे शिवराज
राजनीति में सक्रिय होने के बाद शिवराज सिंह आंदोलनों में भी भाग लेते थे। आपातकाल के विरोध के दौरान वे 1976-1977 तक भोपाल जेल में भी बंद रहे। इसके साथ ही उन्होंने जन समस्याओं को लेकर भी किए गए आंदोलन में जेल यात्रा की।
1990 में पहली बार बने विधायक
शिवराज शादी का ख्याल छोड़ राजनीति में ही अपने करियर को परवान देने में लगे थे। पिता प्रेम सिंह के सामने उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वो कुंवारे ही रहेंगे। वे पहली बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से 1990 में विधायक बने। इसके साथ ही 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीत गए। सांसद बनने के बाद उनकी बहन ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
बहन की जिद पर गए मिलने
बहन की जिद पर ही शिवराज सिंह पहली बार गोंदिया की रहने वाली साधना सिंह से मिलने गए। साधना मतानी परिवार की बेटी थी। मुलाकात के दौरान शिवराज बड़ी मुश्किल से जाकर साधना के सामने बैठे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के दौरान साधना जब पहली बार उनके सामने आईं तो शिवराज ने शादी के लिए हामी भर दी।
चिट्ठी लिख किया था इजहार
शिवराज को पहली ही मुलाकात में साधना सिंह पसंद आ गईं थी। शिवराज के सामने मुश्किल यह था कि वह अपने प्यार का इजहार कैसे करें। इसके बाद उन्होंने अपनी दिल की बात कहने के लिए साधना सिंह को चिट्ठी को लिखी। जिसमें उन्होंने अपने बारे में सारी बातें बताईं। साथ ही उस पत्र में जिक्र किया राजनीतिक जीवन में होने की वजह से वह शायद सामान्य पति-पत्नी की तरह जीवन न जी सकें। कभी-कभी व्यस्तताओं की वजह से लंबे वक्त तक मिलना भी न हो सके।
छुप-छुपकर मिलने लगे
दोनों ने फिर शादी के लिए हामी भर दी। बताया जाता है कि शादी से पहले फिर दोनों छुप-छुपकर भी कई बार मिले थे। जिसमें शिवराज सिंह ने साधना सिंह को गुलाब का फूल देकर अपने प्यार का इजहार किया था। फिर दोनों 6 मई 1992 को शादी के बंधन में बंध गए।
अब दोनों की जिंदगी में खुशियों की भरमार हैं। दोनों के दो बच्चे भी हैं। साधना भी पति से कदम ताल करके चलती हैं। घर के साथ-साथ वो पति की राजनीतिक कार्यों में भी हाथ बंटाती हैं।
Published on:
05 May 2019 01:05 pm
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