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केन्द्रीय कैबिनेट ने NPR को दी मंजूरी, जानें CAA, NRC और NPR में क्या है अंतर

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) अपडेट करने को मंजूरी दे दी है।

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भोपाल

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Pawan Tiwari

Dec 25, 2019

केन्द्रीय कैबिनेट ने NPR को दी मंजूरी, जानें CAA, NRC और NPR में  क्या है अंतर

केन्द्रीय कैबिनेट ने NPR को दी मंजूरी, जानें CAA, NRC और NPR में क्या है अंतर

भोपाल. नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के बाद अब केन्द्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) अपडेट करने को मंजूरी दे दी है। लेकिन अब एनपीआर को लेकर भी सियासत शुरू हो गई है। एनपीआर को लेकर सोशल मीडिया में कई तरह की तस्वीरें वायरल हो रही हैं और इसे CAA और NRC से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन इन तीनों में फर्क है। हम आपको बताते हैं कि आखिर एनपीआर क्यों NRC और CAA से अलग है। इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया कि एनपीआर अपडेशन के दौरान देश के किसी भी नागरिक के द्वारा दी गई जानकारी को ही सही माना जाएगा। इस दौरान नागरिकों को कोई दस्तावेज नहीं देना होगा।

क्या है NPR
एनपीआर देश के सभी नागरिकों का ब्यौरा है।
देश के हर नागरिक को एनपीआर में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।
NPR के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ देश के नागरिकों को मिलता है।
तत्तकालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एनपीआर की शुरुआत की थी।
मोदी सरकार में इसे केवल अपडेट किया जा रहा है।

एनपीआर, एनआरसी और सीएए में क्या फर्क है?

NPR
NPR का प्रयोग केन्द्र सरकार, सरकारी योजनाओं को लागू करने में करती है।
बायोमेट्रिक डाटा के जरिए योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान होती है।
एनपीआर में उसी सूचना को सही माना जाता है जो लोग देते हैं।
यह भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं होता है।

NRC
देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जाती है।
कौन देश का नागरिक है और कौन नहीं इसके लिए सरकार नागरिकों से वैध पहचान पत्र मांगती है।
नागरिकों द्वारा दिए गए दस्तावेजों का परीक्षण सरकार द्वारा कराया जाता है।
इसके बाद वैध नागरिकों की सूची प्रकाशित की जाती है।
इस सूची में शामिल लोगों को ही देश का नागरिक माना जाता है।
देश में अभी केवल असम में एनआरसी लागू है।


CAA
नागरिकता कानून 1955 के तहत 2019 में सरकार संशोधन कानून लेकर आई है।
संशोधित कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को नागरिकता दी जाएगी।
नए कानून के अनुसार नागरिकता उन्हें ही मिलेगी जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए हैं।
इस कानून से देश के मुसलमानों की नागरिकता को कोई खतरा नहीं है।
किसी भी देश या धर्म का नागरिक को भारत की नागरिकता लेने के लिए नागरिकता कानून 1955 की धारा 6 आज भी लागू है।
धारा 6 के साथ मोदी सरकार ने कोई भी छेड़छाड़ नहीं की है।