20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पांच साल बाद फिर से कोलार को बनाया जाएगा नगर पालिका, 30 मार्च तक गठन

नगर निगम से छह वार्ड होंगे अलग: 28 फरवरी को दावे-आपत्तियों पर होगी सुनवाई

2 min read
Google source verification
patrika

patrika

भोपाल. भोपाल नगर निगम से कोलार के छह वार्ड अलग कर कोलार नगर पालिका बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। 30 मार्च तक वार्ड 80, 81, 82, 83, 84 और 85 को मिलाकर नगर पालिका का गठन होगा। 28 फरवरी को दावे-आपत्तियां आमंत्रित कर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। गौरतलब है कि भाजपा शासन में पांच साल पहले कोलार नगर पालिका को भोपाल नगर निगम में शामिल किया गया था। कोलार की आबादी 1.12 लाख है जो पांच साल पहले करीब 90 हजार हुआ करती थी।
मौजूदा कांग्रेस सरकार का प्रयास है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के पहले अधिसूचना जारी कर दी जाए। नगरीय प्रशासन विभाग में गोपनीय रूप से इसकी प्रक्रिया तेजी से जारी है। अब तक अधिकृत रूप से भोपाल कलेक्टर ने कोलार को भोपाल नगर निगम सीमा से बाहर करने का प्रस्ताव नगर निगम को नहीं भेजा है।
भाजपा शासन में छह सितंबर 2014 को कोलार नगर पालिका का नगर निगम में विलय किया गया था। दावा था कि कोलार क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष पैकेज देने की घोषणा भी की थी। अभी सीवेज और जलापूर्ति के लिए काम चल रहा है।

नगर पालिका से निगम तक का सफर
11 नवंबर 2006 में कोलार को नगर पालिका बनाया। इसमें 21 वार्ड बनाए गए।
2007 नवंबर में पहली बार चुनाव कराए गए। इसमें कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं।
2014 वर्ष में फि र विलय की कवायद शुरू होने के कारण इसी वर्ष प्रशासक नियुक्त किया गया।
09 सितंबर 2014 में कोलार को भोपाल नगर निगम में शामिल किया गया। क्षेत्र को चार वार्डों में बांट दिया गया।
ये हो सकता है कारण
मौजूदा सरकार की कोशिश है कि निगम चुनाव में कोलार हुआ तो उत्तर, मध्य व दक्षिण पश्चिम विधानसभा से कांग्रेस बढ़त लेकर निगम पर कब्जा कर सकती है। सितंबर 2014 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने भी नगर निगम में स्थिति मजबूत करने नगर पालिका को भंग कर निगम में मिलाया था। इससे पहले 2006 में 20 पंचायतों को जोडकऱ कोलार नगर पालिका का गठन तत्कालीन मंत्री बाबूलाल गौर ने कराया था। हालांकि नवंबर 2007 में हुए चुनाव में यहां कांग्रेस की मुन्नी मंगलसिंह अध्यक्ष बनीं।

कर्मचारियों की उलझन
6 सितंबर 2014 को कोलार का निगम में विलय किया गया। उस दौरान नपा में 75 नियमित और 354 दैवेभो कर्मचारी (89 दिवसीय) थे। इन्हें नगर निगम में ले लिया गया था। बाद में दैवेभो को 89 दिवसीय से हटाकर 25 दिवसीय कर दिया गया। शासन के आदेश के बाद भी उन्हें विनियमितीकरण का लाभ नहीं मिला। इसके लिए कर्मचारी संघर्ष कर रहे हैं। मंगलवार को भी कोलार के कर्मचारी निगम आयुक्त दत्ता से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने आश्वासन देकर रवाना कर दिया।
प्रमुख सचिव ने निगमायुक्त से की चर्चा
नगरीय प्रशासन प्रमुख सचिव संजय दुबे ने सोमवार को निगमायुक्त बी विजय दत्ता से चर्चा की। दरअसल निकायों की सीमा वृद्घि तथा वार्ड परिसीमन संबंधी प्रस्ताव भेजा गया था। आठ फ रवरी को हुई एमआइसी बैठक में इस प्रस्ताव मंजूरी नहीं मिल। एमआइसी सदस्यों का कहना था कि वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से परिसीमन हो चुका है। अब ये प्रस्ताव पुनर्विचार के लिए एमआइसी में भेजा जा सकता है। तीसरी बार राज्य सरकार खुद निर्णय ले लेगी। हालांकि कोर्ट में नगर पालिका विलय को सही ठहरा चुकी सरकार अब अलग करने के मामले में क्या जवाब देगी?
&भोपाल को 5 नगर पालिकाओं में बांटना चाहिए, कहीं विकास नहीं हुआ है। कांग्रेस नपा बनाकर विकास कर सकती है तो करे।
रामेश्वर शर्मा, क्षेत्रीय विधायक
&हमने तो परिसीमन नहीं करने का प्रस्ताव पास किया था, अब सरकार जो चाहे करे। यह कवायद ठीक नहीं है।
आलोक शर्मा, महापौर