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इस जन्माष्टमी वही संयोग, जो श्रीकृष्ण के जन्म पर था

कृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन अष्टमी उदया तिथि और मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। इसे शास्त्रों के अनुसार शुभ माना जा रहा है।

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Nitesh Tiwari

Aug 25, 2016

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बुरहानपुर. कृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन अष्टमी उदया तिथि और मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। इसे शास्त्रों के अनुसार शुभ माना जा रहा है। 58 साल बाद ऐसा अनूठा संयोग बन रहा है, जब माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है जैसी कृष्ण जन्म के समय थी।

गुरुवार को दिनभर पूरा शहर कृष्ण भक्ति में डूबा रहेगा। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बुधवार रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। ऐसा योग 58 साल पहले 1958 में बना था।

विश्व हिंदू परिषद की ओर से तीन कार्यक्रम
पंडित योगेश तिवारी के अनुसार 24 अगस्त बुधवार की रात 10.13 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त की रात 8.13 बजे तक रहेगी। जबकि 2017 में 15 अगस्त के दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरा शहर गोकुलधाम बन जाएगा। मंदिरों में दिन भर कृष्ण भक्ति गीतों की धुन रहेगी। भक्त मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़ेगा। रात 12 बजे जन्मोत्सव के बाद दही हंंडी फोड़ी जाएगी। इन कार्यक्रमों के लिए मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई है। वहीं विश्व हिंदू परिषद की ओर से भी तीन दिनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

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ऐसे बन रहा संयोग
गोकुलचंद्रमा मंदिर में सुबह 6.30 बजे के लगभग ठाकोरजी का पंचामृत से अभिषेक कर स्नान कराया जाएगा। 8.30 बजे तिलक आरती होगी।11 बजे तक भजन गाए जाएंगे। शाम 6.15 से 7.30 बजे तक मंदिर में कीर्तनगान व रात 12 बजे कृष्ण जन्म के दर्शन के लिए पाट खोले गए। मुखिया गुड्डु भाई ने बताया कि सोमवार को प्रात: 8.30 से 10.30 बजे तक नंदमहोत्सव का पालना मनोरथ भी होगा। राजघाट रोड स्थित राधा रमण मंदिर में अग्रवाल समाज की ओर से सुबह अभिषेक व पूजन होगा।

स्वामीनारायण मंदिर में फूटेगी दही हंडी
श्री स्वामीनारायण मंदिर में श्रीकृष्ण भगवान की लीला चरित्र होगी। मंदिर के स्वामी पुरुषोत्तम प्रियदास ने बताया कि दिनभर विविध आयोजन होंगे। मंदिर में फूलों का आकर्षक डेकोरेशन भी किया गया है। रात्रि में भगवान को चांदी के झूले में झूलाया जाएगा। सोने का मुकुट पहनाएंगे।वहीं राधावल्लभ मंदिर सुबह ठाकुरजी के दर्शन होंगे। रात में कथा भी होगी।इसका वाचन मुखिया शैलेंद्र त्रिवेदी करेंगे। 5 से 8 बजे तक दर्शन के बाद फिर पाट बंद होकर रात 12 बजे खुलेंगे।इसके बाद महाआरती का आयोजन होगा।

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-10.13 बुधवार रात से गुरुवार रात 8.13 बजे तक रहेगी जन्माष्टमी
-05 हजार साल
-पहले हुआ था कृष्ण जन्मोत्सव

-58 साल पहले 1958 में
-आया दूसरा संयोग

-20 फीट से अधिक ऊंची मटकी नहीं बांध सकेंगे
-25 अगस्त 2016 तीसरा संयोग कृष्ण के जन्म जैसा


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