
भोपाल . बड़ा तालाब कैचमेंट एरिया में आने वाले करीब 11 गांवों की जमीन वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में भले ही प्लानिंग एरिया में शामिल कर ली गई हों लेकिन यहां भूखंडों की खरीद फरोख्त बंद नहीं हुई। पिछले 12 साल में भौंरी, बकनिया, फंदा, मीरपुर, खानूगांव सहित आसपास के इलाकों में जमीनों की खरीद फरोख्त को सबसे ज्यादा बढ़ावा जिला पंजीयक कार्यालय से मिला। यहां इन सौदों को बकायदा रजिस्ट्री का स्वरूप मिलता रहा। इन प्रकरणों की संख्या बढऩे पर जब नामंतरण और डायवर्सन के लिए आवेदन कलेक्ट्रेट पहुंचे तो मामले में तकनीकी पेंच सामने आने लगे।
राजस्व न्यायालय ने इस तरह के प्रकरणों में टीएनसीपी संचालनालय से अभिमत मांगने की प्रक्रिया अपना रखी है। प्लानिंग एरिया में डायवर्सन और नामांतरण से पहले जब एसडीएम न्यायालय से अभिमत मांगा गया तो टीएनसीपी ने यहां किसी भी प्रकार की अनुमतियां देने से साफ इंकार दिया। इस प्रकार इन भूखंडों के सौदे अवैध घोषित कर दिए गए, लेकिन रजिस्ट्री दस्तावेज के आधार पर पक्षकार आज भी अपने कब्जों को वाजिब साबित करने पर तुले हुए हैं। जानकारों की राय में ये सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल के अभाव में हो रहा है।
और सूचना के अभाव के कारण तालाब के चारों तरफ इस प्रकार के अवैध सौदे धड़ल्ले से जारी हैं।
प्लानिंग एरिया में सिर्फ ये अनुमतियां
पौधरोपण, स्मारकों का संरक्षण, पर्यटन स्थल, झीलों की गुणवत्ता व संरक्षण के काम , सेप्टिक टैंक, संस्कृति केंद्र, खेती।
भोपाल-सीहोर रोड पर दोनों ओर 250 मीटर तक होटल, मल्टीप्लेक्स की अनुमति।
रिपोर्ट में भोपाल-इंदौर राज्य मार्ग पर सीहोर तक सड़क के दोनों ओर 250 मीटर तक कुछ गतिविधियों की अनुमति है।
मास्टर प्लान 2005 में प्लानिंग एरिया घोषित है। इन स्थानों पर नामंतरण-डायवर्सन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
एसके मुद्गल,
संयुक्त संचालक, टीएनसीपी
कलेक्टर बोले- किसी की साजिश नहीं होगी सफल
बड़ा तालाब संरक्षण और किनारों से गाद बाहर निकालने का क्रम बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को कलेक्टर सुदाम पी खाडे, अपर कलेक्टर दिशा नागवंशी, एसडीएम, तहसीलदार सहित सीमा सुरक्षा बल , बीरबल परिषद, जनाभियान परिषद सहित स्काउट गाइड के कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस मौके पर कलेक्टर ने सभी लोगों के साथ मौके से तसलों और तगाडि़यों की मदद से गाद निकालने श्रमदान किया। कलेक्टर ने कहा कि तालाब के कैचमेंट को बचाने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम मुस्तैद है। यहां किसी भी प्रकार के साजिश को सफल होने नहीं देंगे।
होने दिया जाएगा। कलेक्टर ने कहा कि तालाब संरक्षण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्राथमिकताओं में शामिल है इसलिए सभी विभागों को इस बारे में नियमों के तहत काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
महापौर ने की संगठनों से अपने संसाधन लगाने की अपील
इधर महापौर आलोक शर्मा ने शहर के सामाजिक और निजी संस्थाओं से तालाब संरक्षण के मुद्दे पर आगे आने की अपील की है। महापौर ने एेसे संगठनों से अपने साजो सामान और भारी वाहनों का इस्तेमाल तालाब से गाद निकालने के अभियान में मदद स्वरूप देने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन दिनों से नगर निगम की पूरी मशीनरी गाद निकालने की मुहिम में जुटी हुई है। तालाब से गाद की भारी मात्रा निकाली जा चुकी है और बाकी गाद निकालने के लिए ज्यादा से ज्यादा साधन जुटाए जा रहे हैं।
Published on:
19 Apr 2018 10:30 am
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