
संत नगर की सामाजिक संस्था सिंधी सेन्ट्रल पंचायत ने प्रदेश के सिंधी विस्थापित परिवारों के पट्टा प्रकरणों के निराकरण का सरलीकरण करने की मांग करते हुए कहा है कि अधिकारी जिस रिफ्यूज कार्ड की मांग कर रहे हैं, वह भारत सरकार की तरफ से मिला ही नहीं है, तो उसे कैसे प्रस्तुत किया जाए। इस संबंध में शनिवार को पंचायत के संस्थापक नानक चंदनानी, अध्यक्ष एनडी खेमचंदानी, महासचिव सुरेश जसवानी एवं उपाध्यक्ष वासुदेव वाधवानी व राज मनवानी ने ए.डी.एम. जे.पी. माली से भेंट कर उन्हें ज्ञापन प्रस्तुत किया। यहां तहसीलदार अजय पटेल एवं रमा कलवा भी मौजूद थे।
बैठक की जानकारी देते हुए महासचिव जसवानी ने बताया कि मार्च के प्रथम सप्ताह में मंत्रिमण्डल के निर्णय एवं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान की एक अप्रैल 2018 को सीएम हाऊस में यह घोषणा कि प्रदेश में सिंधी परिवार जहां काबिज हैं, उन्हें वहां का पट्टा प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बीते पचास साठ साल में मकानों में परिवर्तन होना, उसके आगे दुकानों का निर्माण होना स्वाभाविक है, इसलिए किसी भी सिंधी विस्थापित परिवार को चिंता करने की जरूरत नहीं है, हमने अधिकारियों को निर्देशित किया है, उन्हें न केवल मौजूदा स्थान का पट्टा प्रदान किया जाए, बल्कि पट्टों का नवीनीकरण भी किया जाए। पहले कन्वेंस डीड के प्रकरण सुलझेंगे जोन एक कार्यालय में हुई बैठक में श्री माली, श्री पटेल एवं रमा कलवा ने बताया पहले कन्वेंस डीड प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। इसके लिए ढिंढोरा पिटवाया जाएगा और सभी से अपील की गई कि जिनके पास कन्वेंस डीड है, वे प्रोफार्मा जिसे वितरित किया जा रहा है, उसमें जानकारी भरकर दें इसकेे बाद धीरे धीरे अन्य प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। किसी के पास नहीं है रिफ्यूजी कार्ड सिंधी सेन्ट्रल पंचायत पंचायत ने प्रस्तुत ज्ञापन में कहा है कि मंत्रिमण्डल और सीएम की घोषणा के बाद 3 अप्रैल 2018 को राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव का समस्त कलेक्टरों को जो परिपत्र जारी किया गया है
उसमें कहा गया है कि विस्थापित व्यक्ति से तात्पर्य यह है कि भारत पाकिस्तान विभाजन के समय पश्चिमी पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी कार्डधारी सिंधी विस्थापित व्यक्ति और रिफ्यूजी कार्डधारी में उनके वैध उत्तराधिकारी सम्मिलित माने जाएंगे। जबकि भारत पाकिस्तान विभाजन के समय पश्चिमी पाकिस्तान से आए किसी भी सिंधी (हिन्दु) परिवार को किसी तरह का रिफ्यूजी कार्ड नहीं दिया गया था। इस तरह 3 अप्रैल 2018 को प्रमुख सचिव राजस्व का कलेक्टरों को जारी परिपत्र विसंगतिपूर्ण है।
Published on:
22 Apr 2018 11:42 am
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