
सुबह से लेकर देर रात तक औरतों और बच्चों से भी बिकवाई गई शराब
भोपाल. होली का त्योहार एक सप्ताह तक चलता है। इसलिए शराब माफिया अधिक खपत करवा रहा है। सुबह से लेकर देर रात तक यह शराब अवैध अड्डों पर बेची जा रही है। इस धंधे में औरतें और बच्चे भी लगा दिए गए हैं। आबकारी विभाग और पुलिस की कार्रवाई अभी तक अवैध अहातों तक ही हुई है, लेकिन बस्तियों में शराब माफिया रोजाना हजारों लीटर अवैध शराब खपा रहा है। झुग्गी बस्तियों में सक्रिय बेगलाम शराब माफिया अपने एक एजेंट के उजागर होने पर दूसरा एजेंट तैयार कर लेता है और इस काले कारोबार को नहीं रुकने देता। पत्रिका टीम ने अवैध शराब की बिक्री का जायजा लिया। जहरीली व मिलावटी शराब के धंधे के जानकारों ने बताया कि इस क्षेत्र का शराब माफिया एक कमरे में दर्जनभर लोगों से मिलावट का काम करवाता है। सस्ती व यूरिया आदि के मिलावट वाली शराब को उसी बंद कमरे में ढक्कन बिना सील तोड़े निकालकर या इंजेक्शन के जरिए शराब के पौव्वे में भरा जाता है। ढक्कन एल्युमिनियम को होने के चलते इंजेक्शन की निडिल आसानी से पार हो जाती है। रैपर को थोड़ा हटाकर फिर से उसी तरह पैक कर दिया जाता है, जिससे लीकेज भी नहीं होती।
अवैध शराब बिक्री के काम में महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये महिलाएं अवैध शराब बेचने के लिए एजेंट का काम कर रही हैं। अवैध शराब के काम में लिप्त महिला का कहना है कि देशी शराब के एक क्वार्टर पर इन्हें 5 रुपए मिलते हैं। दिन में दो पेटियां तो आराम से बिक जाती हैं। ये ग्राहकों को उधार भी शराब उपलब्ध करा देती हैं। पीने वालों के लिए यह भी शराब के ठेके की जगह इन अड्डों पर आने की बड़ी वजह है।
इन क्षेत्रों में अवैध शराब का धंधा अधिक
अवैध शराब का कारोबार रातीबड़, नीलबड़, अन्ना नगर, एमपी नगर झुग्गियां, बरखेड़ा, इतवारा, चांदमारी, बाणगंगा बस्ती, बाग सेवनियां समेत पूरे शहर में संचालित है। कोलार थाना क्षेत्र में तो यह काम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। पूर्व में पुलिस व आबकारी विभाग ने कार्रवाई भी है, लेकिन कारोबार थमा नहीं। कोलार थाना क्षेत्र की 610 क्वार्टर बस्ती, सनखेड़ी, ओम नगर, दामखेड़ा आदि कई बस्तियों में अवैध शराब का धंधा लंबे समय से चल रहा है। इसके सिवा इसी थाना क्षेत्र के कजलीखेड़ा (कालापानी), बोरदा से लेकर झिरी तक कई गांवों में भी अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
मिथाइल अल्कोहल खतरनाक
जेके हॉस्पिटल में साइकेट्री डिपार्टमेंट के एचओडी व डी-एडिक्शन एक्सपर्ट डॉ. प्रीतेश गौतम का कहना है कि जहरीली शराब सेवन के कई मरीज उनके पास ट्रीटमेंट के लिए आ चुके हैं। इस तरह के मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। इस शराब का बेस मिथाइल अल्कोहल होता है, जो काफी सस्ता होता है। मिथाइल एल्कोहल का एक ड्रम इथाइल अल्कोहल की तीन बोतलों की कीमत में ही मिल जाएगा। मिथाइल अल्हक सीधा ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड, न्यूरॉन, रेटिना पर सीधा असर करता है। नसें खराब हो जाती हैं, जिसे न्यूरोपैथी कहते हैं।
Published on:
24 Mar 2019 08:43 am
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