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बेमिसाल लताः जिनकी आवाज निराश मन में भर देती है ऊर्जा

लताजी ने 90 बरस पूरे किए। मध्यप्रदेश के इंदौर में 28 सितम्बर 1929 को जन्मी हिन्दी सिनेमा की मशहूर पार्श्वगायिका लता मंगेशकर ने फिल्मी और गैर फिल्मी मिलाकर हजारों गीत गाये हैं। इनकी आवाज़ के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हुए हैं।

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भोपाल

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Manish Geete

Sep 26, 2019

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Lata Mangeshkar age and Biography

अशोक मनवानी @ भोपाल

लताजी ने 90 बरस पूरे किए। मध्यप्रदेश के इंदौर में 28 सितम्बर 1929 को जन्मी हिन्दी सिनेमा की मशहूर पार्श्वगायिका लता मंगेशकर ने फिल्मी और गैर फिल्मी मिलाकर हजारों गीत गाये हैं। इनकी आवाज़ के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। लताजी की विशेषता है कि इन्होंने शास्त्रीय संगीत, गजल और पॉप संगीत हर क्षेत्र में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा है और एक समान सफलता पाई है। इनके गीतों से करोड़ों की जिंदगी में रस है। बहुत निराश मन फिर उमंग से जी उठते हैं जब वे स्वर में गाती हैं।

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लता जी हर दिन एक नई ताजगी से गाती हैं। दो-तीन बरस पहले उन्होंने एक पंजाबी एल्बम के लिए भी गाया है। कुछ बरस पहले फिल्म पेज थ्री के लिए गाया गया उनका एक सुमधुर गीत- "कितने अजीब रिश्ते हैं यहाँ पर... " यह सिद्ध करता है कि बढ़ती आयु का उनके गायन पर कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ा।

भारतीय सिनेमा की एक सदी पूरी होने पर उनका मन उल्लास से भर उठा और वे गीत गाने के अनुरोध ठुकरा नहीं पातीं। एक तरफ हम देखते हैं कि अभिनय से जुड़ी वे अनेक नायिकाएं जिनके लिए ताई ने गाया, अब जिन्दगी को अपने घर की चार दीवारी में समेट चुकी हैं, लेकिन लता जी कर्म में यकीन रखते हुए नित नई उंचाईयों के साथ अपनी आराधना में तल्लीन हैं। आज भी मानो वे गा रही हों-अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम… या फिर प्रभु तेरो नाम, जो ध्याये,फल पाये… लता जी सर्वाधिक गीत गाने वाली गायिका और सबसे अधिक भाषाओं में गाने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं।

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यह कितनी सुखद और संतोष देने वाली बात है कि उनका जज्बा आज भी कायम है। चार-पांच दशक तक लगातार हिंदी सिनेमा के लिए पार्श्व गायन कर अलग पहचान बनाने वाली प्रसिद्ध पार्श्व गायिका लता जी के लिए गाना एक इबादत हैं। इसलिए वे जब गीत गाती हैं तब मन से एकाग्र और सिर्फ अपने गायन पर ध्यान देती हैं। अपने पिता दीना नाथ मंगेशकर का दिया आशीर्वाद उनके साथ रहता है। लता जी ने गायन के लिए शब्दों के सही उच्चारण के लिए अनेक भारतीय भाषाओं में खुद को जानकार और पारंगत बनाया। उन्होंने बंगाली, पंजाबी, उर्दू, सिंधी, गुजराती और मराठी भाषाओं की तालीम भी हासिल की।

अनूठे गीतों की श्रृंखला
हिंदी सिनेमा के अनेक लोकप्रिय गीतों के लिए लता जी को जाना जाता है। लता जी के गाए गीतों की श्रृंखला बहुत लम्बी जाती है। लता जी के गाए कुछ गीत तो इतने कर्णप्रिय हैं कि उन्हें बार-बार सुनने की इच्छा होती है।

ऐसे गीतों में तेरे सुर और मेरे गीत…, घर आया मेरा परदेसी…, यूं हसरतों के दाग…, ये जिन्दगी उसी की है…, धीरे धीरे मचल ऐ दिले…, ना कोई उमंग है…, ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम…, आज हम अपनी दुआओं का असर…, दिल अपना और प्रीत परायी…, लाख छुपाओ छुप न सकेगा…, ये हरियाली और ये रास्ता…, ढूंढो-ढूंढो रे साजना… झिलमिल सितारों का आंगन होगा…, मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज न दो… फूल तुम्हें भेजा है ख़त में…, मेरे महबूब तुझे मेरी मोहब्बत की कसम… तू जहाँ-जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा, आएगा… आने वाला…, मोहब्बत की झूठी कहानी पर… जाने क्यों लोग मोहब्बत किया… जोत से जोत जगाते…, हवा में उड़ता जाये… हँसता हुआ नूरानी चेहरा…, जिन्दगी भर नहीं भूलेंगे… मोहे भूल गए सांवरिया… ज्योति कलश छलके…तुम्हे देखती हूं तो लगता है ऐसे… कहीं दीप जले कहीं दिल… ओ सजना बरखा बहार आई… लो आ गयी उनकी याद… अजीब दास्ताँ है ये… शामिल हैं।

इंदौर का अनोखा म्यूजियम लता जी के नाम
इंदौर से कुछ दूरी पर पिगडम्बर ग्राम में लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन रिकॉर्ड संग्रहालय को सुमन चौरसिया ने आकर्षक शक्ल देकर संजोया है। लता जी के गाये गीतों के सभी रिकार्ड्स से, बहुत से रिकॉर्ड तो दुर्लभ श्रेणी के हैं। यहाँ अनेक पुस्तकें भी संग्रहीत हैं। चौरसिया परिवार की संगीत के प्रति आत्मीय अभिरुचि का प्रतीक है ये संग्रहालय। यहाँ फिल्म लेखक, गीतकार, संगीतकार, कलाकार आदि अक्सर आते रहते हैं। यह एक शोध केंद्र भी बन चुका है। लता जी के साथ ही आशा भोसले जी और हृदयनाथ मंगेशकर भी इस संग्रहालय को बहुत पसंद करते हैं।

मध्यप्रदेश सरकार ने दिया सदैव सम्मान
लता जी के नाम से प्रतिष्ठित पुरस्कार स्थापित कर मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें सम्मान दिया है। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लता मंगेशकर पुरस्कार समारोह को भव्य रूप में करने के निर्देश दिए हैं। संस्कृति मंत्री डॉ विजयलक्ष्मी साधौ ने कुछ समय पहले विधान सभा में इसकी सार्वजनिक रूप से पूरी जानकारी भी दी।

लता ताई गाने को हमेशा इबादत या एक पूजा ही समझती हैं। उन्होंने कभी भी चप्पल पहनकर गाना नहीं गाया। हमेश नंगे पैर ही वे गाती और गीत की रिकार्डिंग करवाती हैं।लता मंगेशकर जी खास अवसरों पर विशिष्ट समारोहों के लिए भी गाती रही हैं। लता जी अपने गीत-गायन में शास्त्रीय शैली को अपनाने के साथ-साथ विशेष अंदाज में गाने वाली गायिका मानी जाती हैं और वे अनेक भाषाओं में गाने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं।

इस अवस्था में भी उनका जज्बा कायम है लता जी के प्रति न सिर्फ करोड़ों गीत- संगीत प्रेमियों बल्कि आम लोगों के मन में एक समर्पित गायिका ही नहीं एक आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी भारतीय स्त्री की छवि के साथ विशेष आदर भाव है। चूँकि लता जी का जन्म इंदौर का है, इसलिए लता जी का मध्यप्रदेश में काफी आदर किया जाता है। मध्यप्रदेश के बाशिंदे लता जी और आशा जी सहित उनकी और बहनों उषा जी, मीना जी और भाई हृदयनाथ मंगेशकर के लिए सेहतमंद बने रहने और सवा सौ साल जीने की कामना करते हैं।

लेखक और संगीत के विशेषज्ञ पंकज राग जी की पुस्तक धुनों की यात्रा में लता जी के गायन के विशिष्ट पहलुओं का अनेक अध्यायों में विस्तार से जिक्र है।लता जी के व्यक्तित्व और कृत्तिव पर सुरगाथा पुस्तक भी प्रकाशित की गई है। यतीन्द्र मिश्र इसके लेखक हैं। इसके पहले इंदौर और मुम्बई से लता जी पर केन्द्रित कई पुस्तकें आई हैं। लता मंगेशकर एक विश्व स्तरीय शख्सियत हैं। ये शब्द गीतकार हसरत जयपुरी के हैं। संगीतकार ओपी नैयर ने भी लता जी को मेलोडी क्वीन कहा था।

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