
भाजपा के इस दाव से
भोपाल। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भाजपा ने एक ओर बड़ा दांव खेल दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा के इस दांव से जहां पार्टी और मजबूत होगी, वहीं इसके कारण कांग्रेस को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दरअसल भाजपा ने आगामी 12 अक्टूबर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जन्मशताब्दी वर्ष मनाने का निर्णय लिया है। पार्टी के इस निर्णय के बाद से सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में हडकंप मच गया है। वहीं चर्चा है कि भाजपा के इस दांव से निपटने के लिए कांग्रेस में भी नई रणनीति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
ये है पूरी रणनीति!...
भाजपा के इस दांव के संबंध में राजनीति के जानकार डीके शर्मा बताते हैं कि भाजपा का ये दांव कांग्रेस के लिए बहुत भारी सिद्ध होगा।
उनका कहना है कि जन्मशताब्दी वर्ष मनाकर जहां भाजपा कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में उभर रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेर रही है, वहीं उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया जो भाजपा में हैं, उनकी नाराजगी को भी दूर किया जा सकेगा।
इसलिए नाराज थीं यशोधरा..
राजमाता के योगदान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अभी भी सार्वजनिक तौर पर मानते हैं, लेकिन मप्र में राजनीतिक गुटबाजी की वजह से वर्तमान समय में राजमाता को भुला सा दिया है। हाल के चुनावों मेंं सिंधिया परिवार पर हमले बोले गए हैं। जिससे यशोधरा काफी आहत भी हुई हैं। अपने अपनी पीढ़ा जाहिर भी कर चुकी हैं।
खास बात यह है कि अमित शाह ने हाल ही में 4 मई को भोपाल में कहा था कि राजमाता ने भाजपा को खड़ा करने में महत्वपूर्ण योेगदान दिया। वहीं पिछले साल जब मप्र भाजपा की ओर से अटेर चुनाव में सिंधिया परिवार पर हमला बोला गया था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिंधिया राजघराने के समय क्षेत्र में रेल एवं बांध के निर्माण की तारीफ की थी।
सिंधिया समर्थकों पर हैं निगाहें...
वहीं कई अन्य जानकारों का मानना है इन दिनों भाजपा की निगाहें सिंधिया समर्थकों पर टिकी हुई है। ऐसे में इस रणनीति से जहां भाजपा सिंधिया समर्थक कई लोगों को अपने पक्ष में ला सकती है।वहीं इस कार्य से ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी एक जगह बांधने का कार्य किया जा रहा है।
माना जा रहा है भाजपा इस दांव के सहारे भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह द्वारा दी गई सलाह कि 'बड़े नेताओं को उन्हीं के घर में घेर लो ताकि वे कहीं और न जा पाएं' पर कार्य कर रही है।
दरअसल राजनीति के जानकारों की एक राय ये भी है कि यदि सिंधिया को कमजोर करना है तो उनको ज्यादा बाहर नहीं निकलने दो। माना जा रहा है कि इस आयोजन से जहां ज्योतिरादित्य अपनी पकड़ को बरकरार रखने के लिए अपने क्षेत्र से कम ही बाहर निकल पाएंगे। जिसका सीधा लाभ भाजपा को होगा।
ये है मामला...
दरअसल भाजपा की ओर से राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जन्म शताब्दी वर्ष मनाने की जा चुकीं हैं, जिसके बाद अब सीएम की घोषणा के अनुसार 12 अक्टूबर को विजयाराजे सिंधिया का जन्मशताब्दी मनाई जाएगी।
ज्ञात हो राजमाता विजयाराजे सिंधिया का 12 अक्टूबर को जन्मदिवस है, लेकिन हिन्दू तिथि के मुताबिक हर साल करवाचौथ के दिन भी मनाया जाता है। राजमाता पहले कांग्रेस में थीं, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा राजघरानों के प्रीवी पर्स खत्म करने के बाद दोनों के बीच ठन गई और राजमाता जनसंघ में शामिल हो गई।
वहीं उनके बेटे माधवराव सिंधिया भी कुछ समय तक जनसंघ में रहे, लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली। कहा जाता है कि राजनीति में सबसे ज्यादा खुशी उन्हें अटलबिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने पर हुई थी।
राजमाता के बारे में जानिए...
राजमाता का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को सागर के राणा परिवार में हुआ था। शादी से पहले उनका नाम लेखा दिव्येश्वरी था। उनके पिता महेन्द्रसिंह ठाकुर जालौन जिला के डिप्टी कलेक्टर थे, उनकी माता 'विंदेश्वरी देवी' थीं। विजयाराजे सिंधिया का विवाह के पूर्व का नाम 'लेखा दिव्येश्वरी' था।
21 फरवरी 1941में ग्वालियर के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया से विवाह हुआ। पति की मृत्यु के बाद वह राजनीति में सक्रिय हुई और 1957 से 1998 तक ग्वालियर और गुना संसदीय क्षेत्र से 8 बार सांसद रहीं। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से 25 जनवरी 2001 में उनका निधन हो गया।
Updated on:
19 Aug 2018 04:09 pm
Published on:
19 Aug 2018 04:08 pm

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