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पूरे मध्यप्रदेश के वकील तीन दिन हड़ताल पर, कोर्ट में कामकाज प्रभावित, देखें अपडेट

23 से 25 मार्च तक प्रदेश व्यापी होगा प्रतिवाद दिवस, राज्य अधिवक्ता परिषद ने किया आह्वान...>

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भोपाल

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Manish Geete

Mar 23, 2023

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भोपाल। मध्यप्रदेश के वकील गुरुवार से तीन दिनों के लिए हड़ताल पर हैं। इस दौरान पूरे प्रदेश में कामकाज प्रभावित होगा। सभी वकील न्यायालयीन कामों से अलग रहेंगे और कोर्ट नहीं जाएंगे। वकीलों का विरोध 25 चिन्हित प्रकरणों को तीन माह की समयसीमा में निराकृत करने के आदेश को लेकर है। इधर, गुरुवार को राजधानी भोपाल में जिला कोर्ट में वकील नहीं पहुंचे। वहीं ग्वालियर और इंदौर हाईकोर्ट बैंच में भी सन्नाटा छाया हुआ है।

मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने तीन दिवसीय प्रदेश व्यापी प्रतिवाद दिवस मनाने का आह्वान किया है। प्रदेश भर के अधिवक्ता 23 से 25 मार्च तक न्यायालयीन कार्य से विरत रहकर अदालतों में उपस्थित नहीं होंगे।

राज्य अधिवक्ता परिषद के वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी, मानद सविच राधेलाल गुप्ता व कोषाध्यक्ष मनीष तिवारी ने बुधवार को पत्रकारवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिवाद दिवस मनाने का निर्णय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पुराने प्रकरणों को तीन माह में निपटाने के आदेश के विरोध में लिया गया है।

उन्होंने बताया कि स्टेट बार के सदस्यों ने दो मार्च को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस संबंध में अधिवक्ताओं को होने वाली परेशानी से विस्तार से बताया गया था। 18 मार्च को स्टेेट बार की सामान्य सभा की बैठक में तय हुआ कि यदि हाई कोर्ट ने 22 मार्च तक आदेश वापस नहीं लिया तो 23 मार्च से प्रदेश के अधिवक्ता कार्य से विरत होंगे।

इस निर्णय के बारे में मुख्य न्यायाधीश को अवगत करा दिया गया है। तीन दिन के प्रतिवाद दिवस के बाद 26 मार्च को स्टेट बार की सामान्य सभा की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।

अब इन मुद्दों पर भी करेंगे आंदोलन

स्टेट बार के वाइस चेयरमैन सैनी एवं कोषाध्यक्ष तिवारी ने बताया कि परिषद एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, पेंशन, इंश्योरेंस व कॉलोनी को लेकर भी आंदोलन करेगा। उन्होने कहा कि कई राज्य में अधिवक्ताओं के लिए प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो गया है। प्रदेश में इस दिशा में अब तक सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाए गए।

इधर, ग्वालियर स्टेट बार काउंसिल के अल्टीमेटम के बाद प्रदेशभर के अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। स्टेट बार काउंसिल ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जिला न्यायालय में 25 चयनित प्रकरणों की समयबद्ध निराकरण कीयोजना का विरोध करते हुए इस पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था। स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष प्रेम सिंह भदौरिया ने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से आश्वासन देने के बावजूद कोई सकारात्मक कार्यवाही इस दिशा में नहीं की गई है। 25 प्रकरणों की समयबद्ध निराकरण की जो अनिवार्यता रखी गई है, उससे अधिवक्ताओं को कईतरह की परेशानी और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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